अदालत का सर्वोच्च फरमान, अयोध्या विवाद में मध्यस्थता करेंगे ‘श्रीराम’

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अयोध्या भूमि विवाद में मध्यस्थता को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले का हल मध्यस्थता के जरिए निकाला जाए. इसके लिए रिटायर्ड जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्लाह की अगुवाई में तीन सदस्यीय मध्यस्थता कमेटी गठित की गई है. इसमें श्रीश्री रविशंकर और श्रीराम पंचू शामिल हैं. ये तीनों मध्यस्थ फैजाबाद के एक बंद कमरे में अयोध्या विवाद का बातचीत से हाल निकालेंगे.

सुप्रीम कोर्ट के बनाए इस पैनल में एक नाम है पूर्व जस्टिस श्रीराम पंचू का. श्रीराम पंचू सीनियर एडवोकेट और मिडियेटर (मध्यस्थ) हैं. उन्होंने एक मिडियेटर चैंबर की स्थापना की है, जोकि मध्यस्थता की ही सर्विस देता है. वो IMI (इंटरनेशनल मेडिएशन इंस्टीट्यूट) के बोर्ड डायरेक्टर और इंडियन मेडिएटर्स एसोसिएशन के भी डायरेक्टर हैं.

इन्होंने साल 2005 में भारत का पहला कोर्ट एन्नेक्स्ड मेडिएशन सेंटर (annexed mediation centre) की स्थापना की थी. पंचू को देश में उपभोक्ता आंदोलनों के सबसे बड़े प्रस्तावकों में से एक माना जाता है. उन्होंने साल 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के लागू होने से बहुत पहले ऐसा किया था. पंचू को पूरे देश में मध्यस्थता के लिए जाना जाता है. वह कॉमर्शियल से लेकर कॉर्पेरेट और कॉन्ट्रेक्चुअल विवादों से जुड़े देश के कई जटिल केसों में मध्यस्थता कर चुके हैं. इसमें प्रॉपर्टी, दिवालियापन, फैमिली बिजनेस विवाद, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी के विवाद शामिल हैं. इतना ही नहीं इन्होंने कई इंटरनेशनल कॉमर्शियल डिस्प्युट में भी मध्यस्थता की है.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले इन्हें असम और नागालैंड के बीच 500 स्क्वायर फीट को लेकर बने विवाद की मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी थी. इसके साथ ही उन्हें मुंबई में पारसी कम्युनिटी के पब्लिक डिस्प्युट सहित कई केस में मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी गई थी. इन्होंने मध्यस्थता पर दो किताब भी लिखी है.