किसानों के जीवन में समृद्धि की खुशबू बिखेर रहे हैं गेंदा एवं गुलाब

गुना। फूलों की व्यावसायिक खेती का अधिक-से-अधिक रकबा बढ़ाने की मध्यप्रदेश सरकार की कोशिशों के फलस्वरूप गुना जिले में फूल किसानों के जीवन में समृद्धि की खुशबू बिखेर रहे हैं। गुना शहर से सटे इलाके में जो किसान गेहूँ, चने की पारंपरिक फसलों से उचित लाभ नहीं कमा पाते थे, गेंदे एवं गुलाब की खेती ने उनकी तकदीर बदल दी है।

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कुछ साल पहले उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रदत्त अनुदान की मदद से तीन बीघा में गेंदा, एक बीघा में गुलाब एवं एक बीघा में सेवंती की खेती से शुरूआत करने वाले बांसीखेड़ा के पचपन वर्षीय दौलत सिंह ने ना सिर्फ गेंदे एवं गुलाब की खेती का व्यवसाय स्थापित कर लिया, बल्कि इससे हुई कमाई से मकान बनवा लिया, एक बोर करा लिया, दो बेटियों एवं दो बेटों की शादी कर ली। वे गेंदे की तीन बीघा फसल से तीन माह में डेढ़ लाख रूपये, गुलाब की एक बीघा में सालाना तीन लाख रूपये एवं सेवंती से 50 हजार रूपये कमाते हैं।

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नतीजे में वह लखपति किसान बन गए हैं। खास बात यह है कि इन फूलों की खेती में बहुत कम या ना के बराबर लागत आती है। इसमें थोड़ा-सा समय और ध्यान देने पर ही अच्छे नतीजे मिल जाते हैं। बांसखेड़ी मुख्य मार्ग पर गुना के नजदीक बसा होने के कारण दौलत सिंह को गेंदे, गुलाब एवं सेवंती के फूल गुना समेत शिवपुरी, अशोकनगर एवं इंदौर की मंडी तक पहुंचाने में कोई कठिनाई नहीं आती। उनका पुत्र फूलों की मंडियों तक पहुंचाने की व्यवस्था करता है। इन मंडियों में दौलतसिंह को अपनी पैदावार के अच्छे दाम मिल रहे हैं। अब दौलत सिंह गेंदे, गुलाब, सेवंती की खास प्रजाति के जाने-पहचाने विक्रेता बन चुके हैं।

अन्य फसलों की पैदावार से मायूस हो चुके जिले के किसानों को गेंदे,गुलाब ने रोजगार का नया जरिया मुहैया करा दिया है। इन फूलों की खेती ने अकेले दौलत सिंह ही नहीं, बल्कि कई किसानों की हालत बदल दी है। बीते सालों में फूलों की खेती के प्रति जागरूकता बढ़ने और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को गेंदा, गुलाब और अन्य फूलों की खेती के लिए प्रेरित करने के कारण जिले में फूलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है और यह खेती उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। फूलों की खेती से किसानों और मजदूरों दोनों की कमाई होती है। जिन किसानों ने फूलों की खेती शुरू की, उनके यहां समृद्धि के लक्षण दिखने लगे हैं।

गेंदे, गुलाब के फायदे की वजह से इनके खासे मुरीद रहे दौलत सिंह कहते हैं, “फूलों की खेती से आय तीन गुना बढ़ गई है। इसमें समय भी बहुत कम लगता है।” कलेक्टर श्री राजेश जैन कहते हैं, “गुना जिले में काश्तकारों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें फूलों की खेती के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है।” उपसंचालक उद्यानिकी श्री पी.आर.पाण्डे ने बताया कि जिले में किसानों को फूलों की खेती के लिए पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना के तहत अनुदान दिया जा रहा है और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।

बहरहाल, जिन किसानों ने जब से फूलों की खेती शुरू की, तब से उनके हालात बदलने शुरू हुए। इससे फूलों की खेती वाले इलाकों की अर्थव्यवस्था में बदलाव साफ नजर आता है।