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आज से शुरु हुआ खरमास, जानिए क्या-क्या नहीं करना चाहिए और क्यों ?

भारतीय पंचाग के अनुसार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो यह समय अशुभ माना जाता है इसी कारण जब तक सूर्य मेष राशि में नहीं आ जाते तब तक किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। पंचाग के अनुसार यह समय खरमास या मलमास कहा जाता है। माना जाता है कि इस मास में सूर्य देवता के रथ को घोड़ों की जगह गधे खींचते हैं। विशेषकर उत्तरी एवं मध्य भारत में खरमास की मान्यता अधिक है।

इस पूरे मास यानि मीन संक्रांति से लेकर मेष संक्रांति तक विवाह, सगाई, ग्रह-प्रवेश आदि धार्मिक शुभकार्य या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। नई वस्तुओं, घर, कार आदि की खरीददारी भी नहीं करनी चाहिए। घर का निर्माण कार्य या फिर निर्माण संबंधी सामग्री भी इस समय नहीं खरीदनी चाहिए, यदि निर्माण कार्य पहले ही चल रहा है तो कोई दोष नहीं होता। खरमास को मलमास भी कहा जाता है। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर स्नान-दान आदि करने का महत्व होता है।

मलमास की एकादशियों का उपवास कर भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें तुलसी के पत्तों के साथ खीर का भोग लगाया जाता है। इस मास में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके भगवान विष्णु का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें व तुलसी की माला से 11 बार भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जप करें।

पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है इस मास में पीपल की पूजा करना भी शुभ रहता है। कार्यक्षेत्र में उन्नति के लिए खरमास की नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन करवाना पुण्य फलदायी माना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण कार्य इस मास में यह किया जा सकता है कि दुर्व्यसनों, दुर्विचारों, पापाचार को त्याग कर श्री हरि की भक्ति में मन लगाकर सत्कर्म करने पर जोर दिया जाता है।

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