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करतारपुर गलियारा: भारत ने दोहरायी पाकिस्तान से पुल बनाने की मांग 

नयी दिल्ली 14 जुलाई (वार्ता) पाकिस्तान स्थित डेरा बाबा नानक साहिब तक जाने वाले करतारपुर गलियारे के बारे में आज भारत तथा पाकिस्तान के बीच वाघा सीमा पर दूसरे दौर की बातचीत हई जिसमें दोनों तरफ हो रहे विभिन्न ढांचागत निर्माण कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं के आवागमन के तौर तरीकों से संबंधित समझौता मसौदा पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों पक्षों ने गत मार्च, अप्रैल और मई में तकनीकी टीमों के बीच तीन दौर की वार्ता में बनी सहमति के आधार पर अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने क्रासिंग प्वाइंट या जीरो प्वाइंट पर बनी सहमति पर मुहर लगायी। श्रद्धालुओं की यात्रा के दौरान पाकिस्तान स्थित तत्वों द्वारा व्यवधान पहुंचाये जाने का मुद्दा उठाये जाने पर पाकिस्तान ने आश्वासन दिया है कि वह करतारपुर गलियारे और इस प्रकरण के संबंध में अपनी जमीन पर भारत विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं देगा।

भारत ने पाकिस्तान द्वारा गलियारे को जोड़ने के लिए पुल के बजाय मिट्टी या पक्का तटबंध बनाने के पाकिस्तान के प्रस्ताव पर अपनी चिंता दोहरायी और कहा कि इससे डेरा बाबा नानक साहिब और आस पास के क्षेत्रों में बाढ का पानी भर जायेगा और इससे श्रद्धालुओं को परेशानी के साथ साथ आवागमन में खतरों का सामना करना पड़ेगा। भारत ने कहा है कि यह तटबंध अस्थायी तौर पर भी नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि इससे उद्देश्य के पूरा होने के बजाय उलटे परेशानी बढेगी। भारत गलियारे को जोड़ने के लिए अपनी ओर एक पुल बना रहा है और वह चाहता है कि पाकिस्तान भी अपनी ओर इसी तरह का पुल बनाये जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो। पाकिस्तान ने इस पर सैद्धांतिक सहमति प्रकट की है। उसने कहा है कि वह पहले रावी नदी पर ब्रिज बना रहा है।

भारत ने इस गलियारे को गुरू नानक देव के आगामी नवम्बर में 550 वें प्रकाश उत्सव से पहले चालू करने के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की पेशकश की है। भारत और पाकिस्तान के बीच गत नवम्बर में यह सहमति बनी थी कि 2019 नवम्बर में गुरू नानक देव के 550 वें प्रकाश उत्सव से पहले दोनों को अपने-अपने क्षेत्रों में करतारपुर साहिब यानी डेरा बाबा नानक जाने की सुविधा के लिए करतारपुर गलियारे का काम पूरा करना है। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच पहली वार्ता गत 14 मार्च को अटारी -वाघा सीमा पर भारतीय क्षेत्र में हुई थी। भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एस सी एल दास ने किया । उनके साथ गृह , विदेश , रक्षा मंत्रालय , पंजाब सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी भी थे।

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