कुमारस्वामी जी ! आपने जो बोया था वो ही है काटा, फिर काहे को अब रोना…

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कर्नाटक का सियासी ड्रामा अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. सीएम कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार मंगलवार को गिर गई है. गठबंधन सरकार कुल 6 मतों से पीछे रह गई और विश्वास मत जीतने में कामयाब नहीं हो सकी. वहीं लंबे समय से राज्य में सरकार बनाने के इंतजार में बैठी बीजेपी ने भी कवायद तेज कर दी है.

वैसे कुमारस्वामी को अपने भविष्य का अंदाजा पहले ही हो गया था. प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले सदन में कुमारस्वामी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि देखते हैं कि कैबिनेट गठन के बाद आप सरकार को कैसे बचाएंगे? हम देखेंगे कि आप कब तक सरकार चलाएंगे? मैं ही यहीं हूं. कितना कमल ऑपरेशन चलेगा. तब आपके (बीजेपी) के लोग भागेंगे. इसके बाद चुनाव के लिए जाना बेहतर है. अगर कोई मेरी पार्टी में आता है तो हम किसी को नहीं चाहते हैं.

अब कुमारस्वामी एक तरह से रो ही रहे हैं. उनका ये विलाप इसलिए क्योंकि उनके ही विधायकों ने उनको धोखा दिया. लेकिन एक तरह से कुमारस्वामी के साथ वही हो रहा है, जो वो इससे पहले दूसरों के साथ कर चुके हैं. याने, उन्होंने वो ही काटा है, जो फसल उन्होंने बोई थी. कुमारस्वामी के साथ जो हुआ है, वैसा ही कभी उनकी वजह से कांग्रेस और बीजेपी सरकारों के साथ हुआ था.

2004 में गिराई कांग्रेस सरकार

2004 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कुल 224 सीटों में से बीजेपी को 79, कांग्रेस को 65, जेडीएस को 58 और अन्य को 23 सीटें मिली थी. यानी किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. ऐसे में कांग्रेस और जेडीएस के बीच समझौता हुआ और कांग्रेस के धरमसिंह 28 मई 2004 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने. यह सरकार बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और पौने दो साल के बाद कुमारस्वामी ने अपने विधायकों के साथ समर्थन वापस ले लिया और धरमसिंह की सरकार को गिरा दिया.

2007 में गिराई बीजेपी सरकार

धरमसिंह की सरकार गिरने बाद कुमारस्वामी ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया. इस दौरान बीजेपी-जेडीएस के बीच सरकार बनाने से पहले सहमति बनी थी‍ कि दोनों पार्टियों के नेता बारी-बारी से और बराबर-बराबर समय के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे. कुमारस्वामी 2006 में बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बने. कुमारस्वामी ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया और जब बीजेपी को सत्ता सौंपने का वक्त आया तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. यही नहीं कुमारस्वामी ने 10 नवंबर को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया,

कुमारस्वामी के इस्तीफे के बाद दो दिन तक राष्ट्रपति शासन लगा रहा और फिर बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया. 12 नंबवर 2007 को बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी, जिसे कुमारस्वामी ने बाहर से समर्थन दिया. हालांकि, सात दिन के बाद ही कुमारस्वामी ने बीजेपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसके चलते येदियुरप्‍पा को मुख्यमंत्री पद गंवाना पड़ा.