मायानगरी

कादर खान के एक्टर होने की बेटे को मिली थी सजा, सारी उम्र नहीं भूल पाए वो घटना

बॉलीवुड ने हमें कई नायाब कलाकार दिए हैं और वे कलाकार अपने हुनर मेहनत और अभिनय से हमारा मनोरंजन करते हैं कुछ ऐसे कलाकार हैं जिन्हें मरने के बाद भी हम भुला नहीं सकते, जो बॉलीवुड के नायाब सितारे हैं और वह हमारे ऊपर अपने अभिनय का छाप छोड़ गए हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे ही एक कलाकार के विषय में जो बॉलीवुड में अपने कलाकारी से बहुत फेमस हुए। जी हां हम बात कर रहे हैं अपनी बुलंद आवाज के लिए जाने जाने वाले अभिनेता कादर खान की जिन्होंने कई सुपर हिट फिल्में दी हैं।

अपने फिल्मी कैरियर में कादर खान ने करीब 300 से अधिक फिल्में की है, कादर खान ने अभिनय के अलावा संवाद लेखन का काम भी किया। अपने लंबे फिल्मी कैरियर में कादर खान ने कॉमेडी और विलेन दोनो रोल को बखुबी निभाया विलेन रोल के लिए फेमस हुए खान के विषय में यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होने विलेन रोल को छोड़कर कॉमेडी क्यों अपनाया। तो आइए जानते है वरिष्ठ कलाकार के विषय में कुछ खास बातें।

असल में अभिनेता कादर खान के बेटे के साथ हुई एक घटना के बाद उन्होने नेगेटिव रोल यानी की विलेन का किरदार निभाना बंद कर दिया था। खान ने अपने करियर की शुरुआत विलेन के तौर पर किया था और जल्द ही वह एक मशहूर विलेन बन गए मगर उनके बेटे सरफराज ने एक दिन स्कूल में अपनी लड़ाई के विषय में बताया कि सब उसे विलेन और बुरे आदमी का बेटा कह कर बुलाते हैं। यह बात खान को चुभ गई और वह विलेन का रोल करना बंद कर दिए। उस वक्त बेटे के मुंह से सुनकर कादर खान ठगे से रह गए थे और उन्होंने उसी समय यह फैसला ले लिया की अब वे एक भी नेगेटिव रोल नहीं करेंगे। कादर खान के विषय में यह बात भी बहुत कम लोग जानते हैं कि खान की सफलता के पीछे उनकी माँ थी और माँ ने ही उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया था और उनके एक सलाह ने उन्हें सफलता के आसमान पर बैठा दिया था।

अपने कॉमेडी से फिल्मों में जान भरने वाले अभिनेता कादर खान का बचपन बेहद गरीबी में बीता था और उनकी माली हालत बहुत कमजोर थी मगर उनके गरीबी को अमीरी में उनके मां के सलाह ने बदला। कादर तंगहाली में थे और इसे मिटाने के लिए उनकी मां ने कहा की पढ़ाई करो, यही पढ़ाई सफलता दिलाएगा और मां की यह सीख कादर के दिलों दिमाग में घर कर गई और इसी पढ़ाई के साथ उनके अंदर लिखने का शौक भी आ गया। कादर खान ने पढ़ाई भी अच्छी की थी, वह इस्माइल युसूफ कॉलेज से इंजीनियरिंग किए और बेहतरीन पढ़ाई के बाद एमएच साबू सिद्दीकी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिविल इंजीनियर के प्रोफेसर भी रहे।

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