जरा हट के

अव्वल आई दृष्टिहीन ज्योति, पूरा शहर बोला- शाबाश !

यह कहानी है एक दृष्टिहीन ज्योति की जिसने अपने मन की आँखों से न सिर्फ दुनिया देखा बल्कि सच कर दिखाया उस सपने को जो देखा तो सभी करते है पर पूरा करने की हिम्मत कुछ ही जूता पाते है | हमारे देश में ऐसे प्रतिभा शाली लोग है जिन्होंने अपने मेरिट का लोहा मनवाया है |

कहते है हिम्मते मर्दा तो मददे खुदा, यह कहावत तब ही सही लगती है जब ऐसा वाकया देखने को मिलता है और ज्योति ने भी कुछ ऐसा ही काम किया है | एक छात्रा ने बिना आँखों के ही वह मुकाम हासिल किया जिसकी उम्मीद नही की जा सकती थी | भले ही यह सुनने ,में आश्चर्य लगे पर पिता कालू राम की पुत्री ने दृष्टिहीन होकर भी अपने घरवालों की अरमान को जिन्दा रखा | बेटी को पढ़ाना भी एक मुश्किल से कम नहीं है जो खासकर उन् गरीब मजदूरों के लिए लेकिन इनको पढ़ा दिया तो एक दिन जरूर आपका नाम रौशन करेगी |

आज कल देश भर में बेटी बचाओ बेटी पढाओ के नारों के बीच यह बहुत ही तारीफे काबिल है | वर्ष 2017 में मेट्रिक की की बोर्ड परीक्षा में ज्योति का रिजल्ट देखकर सभी ने शाबाशी दी | जब सी. एम. हाउस से मुख्यमंत्री का बुलावा आया तो उनके होश उड़ गए उन्होंने भी ज्योति के जज्बे को सलाम किया |

गाँव वालों को जब पता चला की ज्योति का रिजल्ट आया है तो उन लोगों ने फूल मालाओं के साथ जबरदस्त स्वागत किया | एक मजदूर की बेटी होकर भी ज्योति ने कभी अपने को कमजोर नहीं समझा, उसके घरवाले ने कभी नहीं सोचा था की हमें और हमारी बेटी को कभी इतना सम्मान मिलेगा |

ज्योति ने कहा की वह इतने में संतुष्ट नहीं रहना चाहती है वह आगे और भी कड़ी तैयारी करना चाहती है , वो कलेक्टर बनना चाहती है |

ऐसी बेटियों को हमारे समाज की ओर से तह दिल से शत शत नमन.|

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