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बिहार के मातम पर रुला देगी एक पत्रकार की ये कविता- ‘चलो हटो, वो मर गया है, उसे मर जाने दो…’

चलो हटो
वो मर गया है
उसे मर जाने दो…
छोंड़ो रास्ता छोंड़ो
अगले को आने दो…
ये मौत तो
आनी जानी है

कभी
गोरखपुर
तो कभी
मुजफ्फरपुर…
बदलते
मौसम की तरह
हर साल
मौत का ये मौसम
जगह बदलता रहेगा…

कभी
ऑक्सीजन नही मिलेगी
तो कभी
चमकी
अपना कहर बरपाएगी…
मौत
जिगर के टुकड़ों को
वाज के झपट्टे सा
पल में छीन कर
ले जाएगी…

वो
सफेद लिबास में
चंद मिनटों के लिए
हस्पताल आएंगे …
कैमरे पर
सारा सिस्टम
ठीक कर जाएंगे…

कुछ बे-दिल साथी
माइक पकड़े
आईसीयू में
बेधड़क
घुस जाएंगे…
बदइंतज़ामी के बीच
असहाय
इलाज कर रहे
डाक्टर को
10 मिनट तक
सवालों की बौछार से
गुनहगार
ठहरा जाएंगे…

जिन 10 मिनटों में
जो डाँक्टर
बचा सकता था
कई मासूम
उन्हीं
10 मिनटों में
कई अर्थियों का
बंदोबस्त
कर जाएंगे…

चलो हटो
वो मर गया है
उसे मर जाने दो…
छोंड़ो रास्ता छोंड़ो
अगले को आने दो…
क्योंकि
ये मातम का मौसम है
कुछ वक्त गुजार कर
ठहर जाएगा
फिर
अगले साल
किसी और जगह
मातम फैलाएगा …

चलो हटो
वो मर गया है
उसे मर जाने दो…
छोंड़ो रास्ता छोंड़ो
अगले को आने दो…😪 श्रद्धांजलि 💐 #रावीबरेलवी lRKl

ये कविता वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवि वैश्य के फेसबुक पेज से साभार ली गई है।

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