झारखंड विधानसभा चुनाव : दस विधायकों के कटे टिकट, कोई सर्वे में कमजोर तो किसी की..

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रांची । झारखंड विधानसभा के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 52 उम्मीदवारों के सूची रविवार की शाम दिल्ली में भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने जारी की।

केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले पांच साल में किये गये बेहतर कामों का मूल्यांकन करते हुए एक बार फिर मुख्यमंत्री रघुवर दास पर भरोसा जताते हुए उनके निर्णय पर मुहर लगा दी। हालांकि पहली सूची में 10 सीटिंग विधायकों के नाम काट गये हैं। उनकी जगह पर नये नामों की घोषणा हुई है। हालांकि अभी कई बड़े नामों की घोषणा भी नहीं हुई है। इनमें ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, विधायक सरयू राय, बोकारो विधायक विरंची नारायण, चंदनकियारी से अमर बाउरी सहिर लोहरदगा सीट शामिल हैं।

जिन लोगों के टिकट कटे हैं उनमें छतरपुर से राधाकृष्ण किशोर हैं। पार्टी के इंटरनल सर्वे में काफी कमजोर रिपोर्टिंग थी। साथ ही क्षेत्र की जनता भी उनसे संतुष्ट नहीं थी। उनकी जगह पर अभी हाल में भाजपा में शामिल हुए पूर्व सांसद मनोज भुइयां की पत्नी पुष्पा देवी को मौका दिया गया है। पुष्पा पहली बार चुनाव मैदान में उतरी हैं।

संथाल परगना पर मुख्यमंत्री रघुवर दास का विशेष ध्यान है। रघुवर दास झारखंड अलग राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा संथाल परगना का दौरा करने मुख्यमंत्री रहे हैं। वहां जनचौपाल लगाकर कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का काम किया। इसके साथ ही कई योजनाएं लागू की। लेकिन, संथाल के बोरियो विधानसभा से विधायक रह चुके ताला मरांडी का टिकट काटने के पीछे की कई वजहें सामने आ रही हैं।

लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली थी। उनके झारखंड मुक्ति मोर्चा में जाने की चर्चा थी। उनकी हेमंत से भी मुलाकात हो चुकी थी, लेकिन बाद में बात नहीं बन पाई। एसटी कोटे की विधानसभा सीट बोरियो से ताला मरांडी की जगह सूर्या बेसरा को मौका दिया गया है।

मनिका से वर्तमान विधायक रहे हरेकृष्ण सिंह की भी फीडबैक खराब मिली थी। पार्टी के तीनों सर्वे में भी उनकी रिपोर्ट सही नहीं थी। परफॉर्मेंस खराब पाया गया था। एसटी कोटे की इस सीट पर हरेकृष्ण सिंह की जगह पर रघुपाल सिंह को टिकट दिया गया है।भाजपा से झरिया विधायक संजीव सिंह हत्या के आरोप में जेल में हैं। हालांकि संजीव की जगह पर उनकी पत्नी रागिनी सिंह को टिकट दिया गया है।

सिंदरी से वर्तमान विधायक फूलचंद मंडल से भाजपा ने किनारा कर लिया। इसकी कई वजहें हैं, लेकिन मुख्य रूप से उनकी अधिक उम्र और क्षेत्र में सक्रियता कम होना बताया जाता है। हालांकि फूलचंद से ज्यादा उम्र के एक प्रत्याशी को भी टिकट दी गई है। फूलचंद की जगह इंद्रजीत महतो को टिकट मिला है।

घाटशिला विधायक लक्ष्मण टुडू केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के काफी करीबी माने जाते हैं। विधान चुनाव के लिए कराये गये सर्वे में इनकी भी परफॉर्मेंस अच्छी नहीं पायी गई थी। उनकी जगह पर लखन मार्डी को मौका दिया गया है।

चतरा से विधायक रहे जयप्रकाश भोक्ता ओबीसी पर पार्टी ने भरोसा नहीं जताया। उनकी जगह पर राष्ट्रीय जनता दल से आये भाजपा में शामिल हुए जनार्दन पासवान को तरजीह दी गई। जनार्दन पासवान को लोकसभा चुनाव के समय पासवान समाज को गोलबंद करने और संगठन की मजबूती के लिए पार्टी में शामिल कराया गया था।

गुमला विधायक शिवशंकर उरांव पर पार्टी के भरोसा नहीं जताने के पीछे लोकसभा चुनाव में उनके क्षेत्र में पार्टी का खराब प्रदर्शन बताया जाता है। पिछला विधानसभा चुनाव भी शिवशंकर काफी कम मार्जिन से जीते थे। उनकी जगह पर भाजपा ने युवा प्रत्याशी मिसिर कुजूर को उम्मीदवार बनाया है।

विमला प्रधान के विधानसभा क्षेत्र सिमडेगा से लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी अर्जुन मुंडा काफी मतों से पीछे रहे थे। इसके साथ ही क्षेत्र से फीडबैकिंग सही नहीं थी। सर्वे रिपोर्ट भी ठीक नहीं थी। विमला की जगह पर सदानंद बेसरा को टिकट दिया गया है।

सिमरिया से विधायक रहे गणेश गंझू के टिकट कटने के पीछे शीर्ष नेतृत्व की नाराजगी बतायी जाती है। दो माह पहले सितंबर में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम से भी उन्होंने दूरी बनाई थी और संकल्प सभा में शामिल नहीं हुए थे। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार के लिए काम करने के भी आरोप लगे थे। संगठन की बैठक और कार्यक्रम में भी शामिल नहीं होते थे। उन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव 2014 में झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर जीता था। फिर भाजपा में शामिल हो गये थे। इसके बाद उन्हें झारखंड राज्य कृषि विपणन परिषद का अध्यक्ष बनाया गया था। परिषद के एमडी के साथ उनका तालमेल नहीं बैठ पा रहा था। एमडी पर मनमानी नियुक्ति और उनके निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए गंझू ने इस्तीफा दे दिया था।