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अब दिल्ली जैसी ही होगी कश्मीर की विधानसभा, जानिए इस फैसले से होगा क्या ?

 

आज केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर एकसाथ तीन-तीन ऐतिहासिक फैसले लिए. पहला ये कि राज्य से धारा 370 हटाई गई है. दूसरा ये कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 35A हटा दिया गया है. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का दो हिस्सों में बंटवारा कर दिया गया है. जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश होगा. एक हिस्सा जम्मू-कश्मीर जबकि दूसरा हिस्सा लद्दाख का होगा जिसमें विधानसभा नहीं होगी.

अब आपको इस तीसरे फैसले की तह में ले जाते हैं. जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर केंद्र को क्या हासिल होगा. इसका जवाब है बहुत कुछ. दरअशल अब इस राज्य की कमान भी उसी तरह से लेफ्टीनेंट गवर्नर के जरिए केंद्र के हाथ में होगी, जैसे दिल्ली की है.

दिल्ली की केजरीवाल सरकार की तरह ही जम्मू-कश्मीर में चुना हुआ मुख्यमंत्री तो होगा. लेकिन सारी संवैधानिक शक्तियां उपराज्यपाल के पास ही होंगी. राज्य सरकार को हर बड़े फैसले के लिए उपराज्यपाल या फिर कहें कि पर्दे के पीछे मौजूद केंद्र सरकार से इजाजत लेनी होगी.

और सबसे बड़ी बात ये कि राज्य की पुलिस अब सीधे केंद्र के अधीन होगी. अबतक आतंकवाद प्रभावित इस सूबे में केंद्र से भेजे गए सुरक्षाबलों और राज्य सरकार की पुलिस के बीच तालमेल की जो कमी नजर आती थी, इस फैसले के बाद वो खत्म हो जाएगी.

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