उत्तर प्रदेश

Father’s day : IPS बेटे ने जब छुए पैर तो बोले पिता- ‘जय हिंद सर’

किसी पिता के लिए वो पल बेहद फख्र महसूस करने का होता है जब उनका सपूत पढ-लिखकर किसी ऊंचे ओहदे पर पहुंच जाता है। और अगर किसी पिता का बेटा आईपीएस बन जाए तो फिर उसका सीना तो गर्व से चौड़ा हो जाता है। लखनऊ के विभूतिखंड थाने में तैनात सिपाही का सिर भी बेटे ने आईपीएस बनकर ऊंचा कर दिया था और कुछ दिनों पहले तो सिपाही पिता को एक बार फिर खुश होने की वजह मिली जब सिपाही पिता के आईपीएस बेटे को लखनऊ जिले में ही तैनाती मिल गई थी। 
लखनऊ के विभूतिखंड थाने में तैनात सिपाही जनार्दन सिंह का चेहरा  अक्टूबर 2018 में खुशी से और दमक गया। और खुशी हो भी क्यों ना आईपीएस बेटे की तैनाती भी उन्ही के शहर लखनऊ में जो हो गई थी। यानी पिता और बेटा लखनऊ शहर में ही काम करेंगे और सिपाही पिता ने अपने कप्तान बेटे को सलाम करते हुए जय हिन्द सर कहा।
 
उत्तर प्रदेश की एसटीएफ में एसपी के पद पर तैनात अनूप सिंह इससे पहले लखनऊ के एएसपी (उत्तरी) थे। आईपीएस अनूप सिंह के पिता जनार्दन सिंह भी विभूतिखंड थाने में सिपाही के पद पर तैनात हैं। गौर करने वाली बात है कि सिपाही पिता और आईपीएस बेटा दोनो ही एक दूसरे की तारीफ करते नहीं थकते । जहां  जनार्दन सिंह गर्व से कहते हैं कि वे उन्होंने ऑन ड्यूटी अपने कप्तान बेटे को सैल्यूट किया था वहीं आईपीएस अनूप सिंह कहते हैं कि वह घर पर पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लेते है लेकिन फर्ज निभाने के दौरान वे प्रोटोकॉल का पालन भी करते है। इधर सिपाही जनार्दन सिंह का कहना है कि उनका  बेटा बहुत ही सख्त और ईमानदार है.वहीं, अनूप सिंह बताते हैं कि उन्होंने फर्ज और संस्कार अपने पिता से सीखे हैं. अनूप सिंह इससे पहले गाजियाबाद, नोएडा में तैनाती के बाद उन्नाव में एएसपी भी रह चुके हैं।
 
आईपीएस अनूप सिंह के पिताजनार्दन सिंह के पिपरा गौतम गांव के रहने वाले हैं. नौकरी के सिलसिले में अलग-अलग जिलों में रहे. इस बीच बेटे की प्रारंभिक शिक्षा बाराबंकी में हुई। ग्रेजुएशन इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किया और फिर जेएनयू से पीजी करने के बाद बेटे अनूप ने सिविल सर्विसेज की तैयारी की और पहली बार में ही सिविल सर्विसेज में चयनित होकर आईपीएस अफसर बन गया. जनार्दन सिंह के मुताबिक दिल्ली स्थित जेएनयू विवि में अच्छे अंक पाने पर बेटे को स्कॉलरशिप मिलती थी. अपने सीमित खर्च के चलते मना करने के बाद भी बेटा स्कॉलरशिप के रुपए भी घर भेज देता था। 
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