‘सेक्स आश्रम’ चलाने वाला अय्याश बाबा, रजिस्‍टर में दर्ज करता था पीरियड्स का रिकॉर्ड

रोहिणी में विजय विहार स्थित आश्रम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के प्रमुख बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को लेकर एक और खुलासा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस विश्वविद्यालय में दो आश्रम बने हैं. एक मुख्य आश्रम है और दूसरा वीवीआईपी आश्रम. वीवीआईपी आश्रम अभी हाल ही में बना है, जिसे मुख्य आश्रम से जोड़ने के लिए सुरंग बनाई गई है. आश्रम में हर कदम पर मेटल गेट हैं और इन पर ताले लगे रहते हैं. मुख्य आश्रम में जो भक्त आते थे, उनमें से लड़कियों को छांटकर बाबा के वीवीआईपी आश्रम में लाया जाता था.

‘सेक्स आश्रम’ चलाने वाला अय्याश बाबा को लेकर बड़ा खुलासा

आश्रम से निकाली गई एक महिला ने बताया कि लड़कियों को 2:30 बजे उठा दिया जाता था और नहलाकर टीवी के जरिए बाबा का उपदेश सुनाया जाता था. इतना ही नहीं आश्रम में आने के बाद बाबा रात के लिए 8-10 लड़कियों को चुनता और फिर उन्‍हें ‘गुप्‍त प्रसाद’ के नाम पर कमरे में ले जाया जाता था. महिला ने खुलासा किया है कि ‘गुप्‍त प्रसाद’ सेक्‍स का कोड वर्ड था. सबसे हैरान करने वाला खुलासा ये है कि आश्रम में एक रजिस्‍टर था जिसमें महिलाओं के मासिक धर्म चक्र (पीरियड) का पूरा रिकॉर्ड रहता था.

रजिस्‍टर में दर्ज होता था महिलाओं के पीरियड्स का रिकॉर्ड

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आश्रम में काम करने वालों में 10 साल की लड़कियों से लेकर 50 साल से अधिक उम्र की औरतें थीं. 10 साल से 28 साल तक की उम्र वाली लड़की बाबा के लिए थी. बाबा आश्रम की तीसरी मंजिल पर रहता था और उस मंजिल पर 28 साल से अधिक उम्र की लड़की का जाना प्रतिबंधित था. 28 साल से 40 साल तक की उम्र वाली लड़की या महिला आश्रम की चौथी मंजिल पर रहती थी, जिसके जिम्मे कपड़े-बर्तन धोने से लेकर साफ-सफाई और खाना बनाने का काम था. 40 साल से अधिक उम्र की महिलाएं मुख्य आश्रम में रहती थीं, जिनके जिम्मे काम शिक्षा देना था.

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अनुयायी ने सुनाई आपबीती

एक न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए वीरेंद्र देव दीक्षित के एक अनुयायी ने बताया कि अनुयायियों को उनके नियमों का पालन करना पड़ता था, मसलन- साथी से सेक्स न करें, सादा भोजन करें, समाजिक आयोजनों व लोगों से दूर रहें. आपको बता दें कि शलभ गुप्‍ता एक एनजीओ(फाउंडेशन फॉर सोशल एंपावरमेंट) से जुड़े हैं और उन्‍होंने ही वीरेंद्र देव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी. खुलासे के बाद से वीरेंद्र के कई भक्‍त अब शलभ को पत्र लिख अपनी आपबीती सांझा कर रहे हैं.