देशमायानगरी

आपातकाल के 44 साल : किशोर कुमार के गानों पर क्यों लगाया था इंदिरा ने बैन ?

ठीक 44 साल पहले आज के ही दिन यानी 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लगी थी. उस वक्त प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 356 के आंतरिक आपातकाल के प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए देश में इमरजेंसी लागू की थी.

इसी आपातकाल में नेताओं के अलावा फिल्म इंडस्ट्री को भी निशाने पर लिया गया था. इंदिरा गांधी ने यह कदम जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के आह्वान और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा के उनके निर्वाचन को खारिज करने के फैसले के बाद उठाया.

जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने राजनारायण की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए इंदिरा गांधी को जनप्रतिनिधि कानून के तहत रायबरेली में उनके चुनाव को खारिज करते हुए संसद सदस्यता के लिए अयोग्य करार दिया था.

इस केस में राजनारायण की पैरवी शांति भूषण ने की थी. जो 1977 में मोरार जी देसाई की जनता पार्टी सरकार में कानून मंत्री बने. आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला दौर कहा जाता है.

आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की खराब होती छवि की चिंता में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ल ने फिल्म गायक किशोर कुमार को संदेश भेजा कि वो इंदिरा गांधी और संजय गांधी के उपर लिखे गीत को अपनी आवाज दें.

लेकिन अपनी धुन के पक्के किशोर कुमार ने इसके लिए मना कर दिया. किशोर कुमार के इनकार के बाद आग-बबूला हुए वीसी शुक्ल ने उनके गानों को ऑल इंडिया रेडियो पर तीन साल के लिए बैन कर दिया.

इस मामले में किशोर कुमार ने एक बार कहा था, “कौन जाने वो क्यों आए, लेकिन कोई भी मुझसे वो नहीं करा सकता जो मैं नहीं करना चाहता. मैं किसी और की इच्छा या हुकुम से नहीं गाता. मैं समाजसेवा के लिए हमेशा ही गाता हूं.”

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