परंपरा या प्रताड़ना: तीन भारतीय रिवाज जो ले लेते हैं कई जान

हमारा देश भी गजब है. हम लोग आस्थावान हैं, और इसी आस्था के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी परंपराएं और रीति-रिवाज हैं, जिन पर यकीन करना भी मुश्किल होता है. आज हम आपको बता रहे हैं अपने देश के ऐसे ही रीति-रिवाजों के बारे में जो हर साल कइयों की जान ले लेते हैं.
ऊपर जो तस्वीर आपने देखी है, वो तमिलनाडु की है. यहां कई इलाकों में गरुड़ थुक्कम नामक रीति-रिवाज मनाया जाता है. इसमें कुछ लोग काली देवी के मंदिरों में गरुड़ पक्षी की तरह सजते हैं, फिर उन्हें उनकी चमड़ी से बैलगाड़ी जैसे वाहन पर लटका कर शहर में घुमाया जाता है. ये दृश्य रूह कंपाने वाला होता है जो धार्मिक मान्यताओं के चलते आज भी जारी है.

तमिलनाडु के महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों के सिर पर नारियल फोड़ने की भी प्रथा है. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं.

मध्यप्रदेश के बड़नगर में एकादशी के दिन सैंकड़ो लोग दौड़ते हुए गाय-बैलों के सामने लेट जाते हैं. गाय-बैल लोगों को कुचलते हुए निकलते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस तरह से लोगों के घरों में खुशहाली आती है.

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