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एक और मामले में बुरे फंसे सलमान खान, जानिए केस दर्ज होगा या मिलेगी राहत !

सलमान खान।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला में फिल्म अभिनेता सलमान खान द्वारा सीआरपीसी की धारा 340 के तहत पेश किए दो अलग-अलग प्रार्थना पत्रों पर मंगलवार को बचाव पक्ष तथा अभियोजन की ओर से बहस पूरी हो गई। सुनवाई के दौरान सलमान खान के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि सलमान खान का किसी भी तरह का यह मंतव्य नहीं था कि वह झूठा शपथ पत्र दे, ऐसे में उसके विरुद्ध किसी तरह की कार्यवाही करना न्यायोचित नहीं है। अब कोर्ट 17 जून को अपना फैसला सुनाएगा कि इस मामले में सलमान के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए या नहीं।

गौरतलब है कि आम्र्स एक्ट मामले में बरी हो चुके सलमान खान के खिलाफ सरकार की ओर से सीआरपीसी की धारा 340 के तहत दो प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश किए गए थे। दूसरी ओर से सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत की ओर से पेश किए गए प्रार्थना पत्र में हिरण शिकार मामले के अनुसंधान अधिकारी ललित बोड़ा के खिलाफ झूठी गवाही देने तथा झूठे शपथ पत्र पेश करने के आरोप लगाया गया था। सलमान खान ने आर्म्स एक्ट मामले की ट्रायल के दौरान एक शपथ पत्र पेश किया था कि उसके हथियार का लाइसेंस गुम हो गया है जबकि इसी दौरान हथियार का लाइसेंस मुंबई में नवीनीकरण के लिए पेश किया गया था।
ऐसे में अभियोजन पक्ष ने सीआरपीसी की धारा 340 के तहत आरोप लगाया था कि सलमान ने झूठा शपथ पत्र पेश करते हुए कोर्ट को गुमराह किया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान सलमान को अपना लाइसेंस कोर्ट में जमा करवाना था लेकिन सलमान की तरफ से शपथ पत्र देकर बताया गया कि उसका लाइसेंस खो गया जबकि लाइसेंस नवीनीकरण के लिए दिया हुआ था।
अभियोजन ने इस शपथपत्र को झूठा बताते हुए कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए दंड प्रक्रिया संहिता 340 के तहत कार्यवाही करने का प्रार्थना पत्र 2006 में पेश किया था जिस पर लगातार सुनवाई के बाद मंगलवार को इस पर आदेश की तिथि 17 जून तय की है। अभियोजन के दूसरे प्रार्थना पत्र में सलमान द्वारा पेशी के दौरान अनुपस्थित रहने के दौरान हाजिरी माफी में झूठा बहाना बनाने का आरोप लगाया गया है। झूठे शपथ पत्र तथा झूठी गवाही देने पर ऐसे गवाहों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत सरकार अदालत में शिकायत करती है। ऐसे गवाह के खिलाफ अदालत में झूठा बयान देने के मामले में आईपीसी की धारा 193 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम सात साल कैद की सजा का प्रावधान है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में जोधपुर में अपनी फिल्म हम साथ-साथ है की शूटिंग के दौरान सलमान खान के खिलाफ हिरण शिकार के तीन व आर्म्स एक्ट का एक प्रकरण दर्ज किया गया था। आर्म्स एक्ट में उन्हें गत वर्ष बरी कर दिया गया। तीन मामलों में कोर्ट ने सलमान को दोषी करार देते हुए सजा सुना रखी है। इसमें से एक मामले में हाईकोर्ट से उन्हें बरी कर दिया गया जबकि शेष अन्य दो मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट से सलमान को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है।

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