धर्म

कभी किसी को ना देखें करते हुए ये 5 काम, वरना आप भी बन जाएंगे पाप के भागीदार

पाप तो कभी भी नहीं करना चाहिए वर्ना परिणाम बहुत बुरा और बद्तर भुगतना पड़ता है। ज़रुरी नहीं कि आपके पाप करने से ही आपको पाप लगता है। पुराणों में लिखा है कि यदि आप अपनी आंखों से ही कुछ गलत होता देखते हैं तो आपको उस गलत को देखने का भी पाप लग जाता है। इसलिए सावधान—

1)नास्तिक लोग ईश्वर को नहीं मानते हैं। वह ईश्वर को नहीं मानते हैं और बुराई करते हैं जो बहुत बड़ा पाप है। यदि कोई आपके आस पास ऐसा व्यक्ति है। जो ईश्वर की निंदा चर्चा करते रहते हैं। तो आप उनसे दूरी बनाएं रखें क्योंकि ऐसे लोगों की बाते सुनने से ही आपको पाप लगता है।

2) गुस्सा जो कि इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। यह भी एक पाप के लिस्ट में आता है। जो व्यक्ति हर बात पर नाराज़ होते है, लड़ते है उनको देखने से ही पाप लग जाता है। ऐसे व्यक्ति से लड़ना भी नहीं चाहिए क्योंकि ऐसे व्यक्ति तो पापी होते ही है उस पर यदि आप बहस करते हैं या बुरा भला कहते है तो आप भी पापी बन जाते हैं।

3)बहुत लोगों का गुस्सा ऐसा होता है कि वह गुस्से में तोड़फोड़ कर देते है। कई लोग तो ऐसे होते हैं जो देवी- देवताओं के मूर्ती के साथ भी तोड़फोड़ करते हैं। ऐसे लोग नर्क गामी होते हैं। ऐसे लोग के साथ रहने से आपको भी नर्क प्राप्त हो सकता है।

4) कारोबार तो बहुत लोग बहुत तरीकों के करते है। परंतु ध्यान रखें यदि कोई पूजा-पाठ करने वाला पंडित यदि सूद का कारोबार करता है तो उस पंडित को अपने घर के पूजा स्थल में भी प्रवेश न करने दें और न ही ऐसे पंडित से कोई पूजा पाठ करवाएं। ऐसे लोग पाप बहुत करते है जो सूद का कारोबार करते हैं। पंडित घर के पर्यावरण को शुद्ध करते हैं परंतु सूद का काम जो पंडित करते हैं उनसे घर में पूजा पाठ कराने से घर की सारी सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और आप भी उस पंडित के कारण पाप कमा लेते है।

5) पेड़-पौधों में देवताओं का स्थान होता है। ऐसा कहा भी जाता है और ऐसा लोग भी मानते हैं। तभी तो पीपल के पेड़ की लोग पूजा अर्चना करते हैं। जो व्यक्ति पेड़-पौधे बिना किसी कारण के काटते हैं वह तो प्रकृति का नुकसान करते ही है साथ ही महापापी भी होते हैं। इसके अलावा जो पीपल के पेड़ को काट देते हैं। उस व्यक्ति के मुख को देखने से ही पाप चढ़ जाता है।

ऊपर पांच तरह के पापों का उल्लेख किया गया है। इन पांच तरीके के पाप आप भी कभी-कभी करते हैं। आप ही क्यों हम सभी मनुष्य करते हैं वह पाप है गुस्सा। परंतु यह बात हमें पता नहीं थी अब पता चल गया तो चलिए आज से हम सब कोई पाप नहीं करेंगे। न बेवजह गुस्सा करेंगे, न किसी की आलोचना करेंगे ईश्वर की तो बिल्कुल भी नहीं। किसी देवी देवता के मूर्ती को तोड़ेंगे नहीं। यदि आस-पास का कोई व्यक्ति करता है तो उसे भी इन पापों के विषय में बताकर उनके पाप को कम करेंगे और अगर तब भी न मानें तो दूरियां बनाऐंगे।

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