अगर आप इस गंभीर बीमारी से हैं परेशान तो कीजिये ये आयुर्वेदिक इलाज

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अब टाइप-2 डायबिटीज़ (TYPE-2 DIABETES) के रोगियों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसका असरकारक आयुर्वेदिक इलाज (AYURVEDIC TREATMENT) खोज लिया गया है। अलग-अलग शोध में पता चला है कि टाइप-2 डायबिटीज़ के रोग में बीजीआर-34 (BGR 34) आयुर्वेदिक दवाई (AYURVEDIC MEDICINE) बहुत असरकारक है। सरकार की ओर से चलाये जा रहे डायबिटीज़ मैनेजमेंट कार्यक्रम (DIABETES MANAGEMENT PROGRAM) के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा विकसित बीजीआर-34 आयुर्वेदिक दवाई काफी उपयोगी और असरकारक सिद्ध हो रही है। विभिन्न शोध में इस आयुर्वेदिक दवाई को टाइप-2 डायबिटीज़ रोगियों के लिये बहुत कारगर पाया गया है।

क्या होती है टाइप-2 डायबिटीज़ ?

टाइप-1 डायबिटीज़ बच्चों में होती है। जबकि टाइप-2 डायबिटीज़ 35 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को होती है। यह रोग अक्सर मोटे लोगों को होता है। इस रोग की खास बात यह है कि 50 प्रतिशत रोगियों को तो इसका पता ही नहीं होता है। जब इसके लक्षण नहीं दिखते हैं तो लोग जाँच भी नहीं कराते हैं और इसीलिये इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इस रोग से बचने का सर्वोत्तम उपाय है कि 45 वर्ष के बाद हर व्यक्ति को डायबिटीज़ की जाँच करवानी चाहिये और जैसे ही पता चले कि डायबिटीज़ है, तो तुरंत डॉक्टर का संपर्क करना चाहिये। क्योंकि डॉक्टर ही आपकी बीमारी के बारे में आपको बेहतर ढंग से समझा सकता है। इसके अलावा अलग-अलग व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग होते हैं, वैसे ही हर व्यक्ति के लिये इसका इलाज भी अलग होता है। किसी को शुरू से ही इंसुलिन देने की जरूरत होती है तो किसी को बाद में। इस बीमारी के लिये निगरानी बहुत जरूरी होती है और इसके रोगी को सप्ताह में कम से कम चार से पाँच बार ग्लूकोज़ चेक करना चाहिये।

डायबिटीज़ का आयुर्वेद इलाज

डायबिटीज़ मैनेजमेंट कार्यक्रम में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा विकसित आयुर्वेदिक दवा काफी उपयोगी और असरकारक सिद्ध हो रही है। विभिन्न शोध में आयुर्वेदिक दवाइयों को टाइप-2 डायबिटीज़ रोगियों के लिये बहुत कारगर पाया गया है।

सरकार भी देश भर में डायबिटीज़ मैनेजमेंट को लेकर कार्यक्रम चला रही है। इसी के तहत गुजरात के सुरेन्द्रनगर, राजस्थान के भीलवाड़ा और बिहार के गया जिले में डायबिटीज़ की रोकथाम और नियंत्रण के लिये काम किया जा रहा है। अभी तक इन तीनों जिलों के 59 स्वास्थ्य केन्द्रों पर सरकार की ओर से काफी अच्छे ढंग से कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इनमें 49 सीएचसी और 3 जिला अस्पताल शामिल हैं। यहाँ पर आयुर्वेदिक दवाइयों और योग के जरिये रोगियों का उपचार किया जा रहा है।

पिछले दिनों लोकसभा में केन्द्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा था कि देश में डायबिटीज़ के रोगी काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि 2025 तक देश में डायबिटीज़ के रोगियों की संख्या 6.99 करोड़ तक पहुँच सकती है। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा था कि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने रिसर्च के बाद आयुर्वेदिक दवाई बीजीआर-34 को तैयार किया है। इस दवाई को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैज्ञानिकों ने भी स्वतंत्र परीक्षणों के बाद डायबिटीज़ के रोगियों के लिये असरकारक बताया है।

सामान्यतः सरकार के तय नियमों के अंतर्गत दवाइयों को बाजार में उतारने के बाद भी उसके प्रभाव का स्वतंत्र रूप से रोगियों पर परीक्षण किया जाता है। इसी के तहत वैज्ञानिकों ने डायबिटीज़ मैनेजमेंट में इस दवाई को बहुत असरकारक पाया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित CSIR CIMAP और NBRI प्रयोगशालाओं में भी आयुर्वेद के प्राचीन फॉर्मूले पर शोध करने के बाद बीजीआर-34 को आधुनिक पैमानों पर मापने का प्रयास किया गया, जिसमें सिद्ध हुआ है कि टाइप-2 डायबिटीज़ रोगियों के लिये यह दवाई काफी असरकारक है।