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गर्भ का हिंदू बच्चा बना मुस्लिम और मुस्लिम खून बन गया हिंदू, जरूर पढ़िएगा ये सच्ची कहानी

देश में आए दिन हिन्दू मिस्लिम को लेकर लोगो में बहस चलती रहती हैं. यदि आप सोशल मीडिया के कमेन्ट सेक्शन में नज़र डालेंगे तो आपको कई हिन्दू मुस्लिम एक दुसरे से लड़ाई करते या सामने वाले को नीचा दिखाते दिख जाएंगे. लेकिन आज हम आपको हिन्दू मुस्लिम से जुड़ी एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं तो ना सिर्फ आपकी दिल छू लेगी बल्कि आप इसे पढ़ने के बाद हिन्दू मुस्लिम में भेदभाव करना भी भूल जाओगे.

ये कहानी हैं दो ऐसे बच्चों कि जिनका जन्म तो अपने धर्म की महिला की कोख से हुआ हैं लेकिन परवरिश दुसरे धर्म में हो रही हैं. यहाँ दो माँ हैं. एक हिन्दू और दूसरी मुस्लिम. हिन्दू माँ शेवाली बोडो के घर एक मुस्लिम बच्चा जुनैद पल रहा हैं जबकि मुस्लिम माँ सलमा परवीन के यहाँ हिन्दू बच्चा रेयान पल रहा हैं.ये दोनों ही माँ जानती हैं कि इन बच्चों ने इनकी कोख से जन्म नहीं लिया हैं, ये दुसरे धर्म का खून हैं, लेकिन इसके बावजूद ये दोनों अपने अपने बच्चों को बड़े लाड़ प्यार से पाल रही हैं. आइए विस्तार से जाने क्या हैं इनकी कहानी…

ऐसे हुई बच्चों की अदला बदली

असम के मंगलदई के छोटे से गांव बेइसपारामें रहने वाले इस हिन्दू मुस्लिम परिवार की कहानी पूरी तरह फिल्मी हैं. दरअसल 11 मार्च 2015 को सलमा और शेवाली दोनों को एक साथ करीब सुबह 7 बच्चे अस्पताल के लेबर रूम ले जाया गया. इन दोनों माताओं ने सिर्फ 5 मिनट के अंतर पर बच्चे को जन्म दिया. सलमा के बच्चे का जन्म 7:10 पर हुआ जबकि शेवाली के बच्चे का जन्म 7:15 पर हुआ. ये दोनों ही बच्चे 3 किलोग्राम के थे और दोनों ही माताओं की डिलीवरी नार्मल थी. यहाँ नर्स स्टाफ की गलती की वजह से दोनों बच्चे आपस में बदल गए. हिन्दू माँ को मुस्लिम बच्चा मिला जबकि मुस्लिम माँ को हिन्दू बच्चा दिया गया.

ऐसे सामने आई सच्चाई

12 मार्च को जब सलमा बच्चा लेकर घर गई तो उसे शक होने लगा कि ये बच्चा उसका नहीं हैं. बच्चे के का चेहरा और रंग दोनों ही उनके परिवार से मेल नहीं खाता था. जब सलमा ने ये बात अपने पति शाहबुद्दीन को बताई तो उसने यकीन नहीं किया. इसके बाद जब सलमा जिद पर अड़ गई तो उन्होंने अस्पताल जाकर बात करी. अस्पताल वालो ने शाहबुद्दीन को बोला कि तुम्हारी बीवी पागल हो गई हैं. शाहबुद्दीन अस्पताल वालो की बात मान वापस तो आ गए लेकिन उनकी बीवी अपनी बात पर कायम रही. इसके बाद शाहबुद्दीन ने दो हफ्ते बाद आरटीआई दाखिल कर 11 मार्च को जन्मे बच्चों की जानकारी मांगी. यहाँ उन्हें पता चला कि उनकी बीवी सलमा के साथ लेबर रूम में शेवाली बोडो नाम की औरत भी थी.

शाहबुद्दीन ने बच्चों की अदला बदली की बात शेवाली के पति अनिल को बताई लेकिन उन्हें इस पर यकीन नहीं हुआ. उधर अस्पताल प्रशासन भी अपनी गलती स्वीकार करने को तैयार नहीं था. अंत में शाहबुद्दीन ने डीएनए टेस्ट करवाया तब सच्चाई सामने आई. जब ये रिपोर्ट शेवाली के पति ने देखी तो उन्हें भी यकीन हो गया कि हमारे बच्चे आपस में बदले हैं.

सच्चाई के बाद भी पाल रहे दुसरे आ खून

डीएनए रिपोर्ट के बाद दोनों परिवार ने पुलिस में अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज की, फिर ये मामला कोर्ट में गया और बच्चे व माता पिता के कुछ टेस्ट भी हुए. इन सब के चक्कर में नवम्बर 2016 यानी करीब 1 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए बच्चो की अदला बदली की पुष्टि की. जज ने उसे एक मानवीय गलती बताते हुए अस्पताल की नर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया.

उधर जब दोनों परिवार आपस में बच्चे बदलने लगे तो ना तो मुस्लिम बच्चा जुनैद अपनी हिन्दू माँ को छोड़ने को तैयार था और ना ही हिन्दू बच्चा रेयान अपनी मुस्लिम माँ को छोड़ने को तैयार था. बच्चों का मोह देख दोनों परिवार ने निर्णय लिया कि वे बच्चो को वापस नहीं करेंगे और इनका लालन पोषण करेंगे.

शाहबुद्दीन का कहना हैं कि ‘ऊपर वाला तो एक समान बच्चे को बना कर धरती पर भेज देता हैं. यहाँ हम लोग ही उस पर हिन्दू मुस्लिम का ठप्पा लगा देते हैं. बच्चा क्या जाने कौन हिन्दू? कौन मुस्लिम?’ उधर दोनों बच्चों की माताओं का कहना हैं कि हमें इनके दुसरे धर्म के होने से कोई दिक्कत नहीं हैं लेकिन जब ये बड़े होंगे तो समाज इन्हें हिन्दू मुस्लिम के जंजाल में उलझा कर इनका जीना हराम ना कर दे.

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