She’s everyehere !!! क्या आपको पसंद आयी काजोल की माँ…

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Helicopter Eela Movie Review, Kajol

फिल्म जगत की जानी  मानी अदाकारा और अजय देवगन की पत्नी काजोल की हेल‍िकॉप्‍टर ईला की कहानी से कई मह‍िलाएं जुड़ा महसूस करेंगी, हालांक‍ि फ‍िल्‍म को अभी और कसने की जरूरत थी। ईला रायतुर्कर (काजोल) एक सिंगल मदर है। उसका बेटा विवान (रिद्धि सेन) एक कॉलेज स्टूडेंट है। व‍िवान की मां की नजर हमेशा उस पर टिकी रहती है, इसलिए वह शर्मिंदा महसूस करता है।

आगे बढ़ने से पहले बता दें क‍ि हेलीकॉप्टर पैरेंट्स उनको कहा जाता है जो अपने बच्चों के जीवन और अनुभवों पर ज्यादा ध्यान गड़ाए रहते हैं। ईला बिल्कुल ऐसी ही सिंगल मदर है। वह विवान को उसके डब्बे ( टिफिन) की याद दिलाती है, विवान को अपना सेलफोन अलग रखकर उसे ज्यादा समय देने को कहती है, विवान की प्राइवेसी की परवाह नहीं करती और बगैर सोचे उसके कमरे में घुस जाती है, उसके फोन पर बातचीत को छुप कर सुनती है।

विवान उसके व्यवहार पर चिल्लाता है तो वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बहाने उसका कॉलेज जॉइन कर लेती है। जब ईला विवान पर नजर रखने के लिए विकल्पों की खोज में निकलती है तो विवान को और ‘अपना स्पेस’ गंवाना पड़ता है, परिणामस्वरूप दोनों के रिश्तों में तनाव पैदा होने लगता है।

फ्लैशबैक: ईला पार्टटाइम मॉडलिंग करती हुई दिखायी जाती है। वह इसके साथ प्लेबैक सिंगर बनने का सपना देखती है। लेकिन इसके पहले की वह जिंदगी में कुछ बड़ा कर पाती कि वह विवान को जन्म देती है। अब उसका पूरा जीवन उसका बेटा हो जाता है।

फास्ट फारवर्ड: ईला, एक मदर, को कालेज के गलियारों में टहलते हुए दिखाया जाता है। काजोल जबरदस्त फार्म में हैं। ऑडियंस को अपने संघर्ष में बांधकर रखती हैं। लेकिन कई जगहों पर ये गैरवाजिब लगता है।

रिद्धि सेन (20) एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता हैं और वह विवान के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। वे किशोरावस्था में गुजरते एक युवा के मानसिक विक्षोभ को भलीभांति चित्रित करते हैं। काफी तर्कपूर्ण हैं, कभी-कभी अधिक भावुक और नाटकीय नजर आते हैं। ठीक अपनी सिंगल मदर की तरह विवान भी उस पर (अपनी मां पर) अपने संगीत के सपने को पूरा करने के लिए जोर डालता है। मां और बेटे के बीच भावुकता लेखक की कमजोरी के बावजूद फिल्म को दर्शनीय बनाती है। जब वे भावनाओं के उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं तो हमें दिल को छू लेने वाले क्षण देखने को मिलते हैं।

हेलीकॉप्टर ईला आनंद गांधी के गुजराती नाटक ‘बेटा कागदो’ पर आधारित है। नेहा धूपिया कालेज में नाटक निर्देशक के रोल में हैं। जब कोई अपेक्षित सुर में नहीं गाता है तो वह तुरंत गुस्‍से में आ जाती है। हालांकि अपने इस व्‍यवहार के बावजूद वह ईला को सपोर्ट करती है। फ‍िल्‍म की स्क्रिप्ट कुछ फीकी है, फिर भी कुछ सीन हैं जो आपका दिल जीतने में कामयाब होते हैं। इसका श्रेय काजोल को जाता है। स्क्रीन पर ज्यादा समय वही नजर आती हैं और आपका ध्यान खींचती हैं।

फिल्म के कुछ छोर कमजोर हैं,जो फिल्म के प्रवाह में बाधा बनते हैं। बेटे और मां के बीच द्वंद्व सुविधाजनक ढंग से हल हो जाता है। क्लाइमैक्स में काजोल का परफॉर्मेंस देखते बनता है। फिल्म बॉलीवुड के तमाम इमोशंस भरे हैं  और इस वजह से फ‍िल्‍म कई बार अटकी नजर आती है।