इंदौर: कोरोना से अब तक 21 मौत, लेकिन कब्रिस्तान पहुंचे 145 जनाजे, डरा देगी ये रिपोर्ट

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मध्य प्रदेश में मंगलवार को कोरोना के 57 नए मरीज मिले। इनमें इंदौर में 22, भोपाल 29 और 6 ग्वालियर (एक श्योपुर) के मरीज हैं। इंदौर में दो लोगों की मौत भी हुई है। राजधानी में 14 स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और 7 पुलिस कर्मचारी और उनके परिवार के लोग वायरस की चपेट में आए हैं। इस बीच  इंदौर में एक अजीबोरगिब घटना देखने को मिल रही है। शहर के चार प्रमुख मुस्लिम कब्रिस्तानों में लाए गए शवों की संख्या में अचानक वृद्धि देखने को मिली है।

चौंकाने वाली बात यह है कि शहर में मार्च की अपेक्षा अप्रैल के मात्र छह दिनों में ही अचानक मुस्लिम समाज में मृत्यु दर बढ़ी है। शहर के चार बड़े कब्रिस्तानों से मिले आंकड़े तो यही कह रहे हैं। इन्हें सही मानें तो 1 से 6 अप्रैल के बीच इन कब्रिस्तानों में 127 जनाजे पहुंचे, यह आंकड़ा सातवें दिन 145 पर पहुंच गया। मतलब एक दिन में ही 18 जनाजे सिर्फ उन्हीं चार कब्रिस्तान में पहुंचे, जो क्वारैंटाइन एरिया के लिए ही हैं। जबकि मार्च में इन्हीं चार कब्रिस्तानों में 130 शवों को दफनाया गया था। हालांकि, श्मशान में भी शव लाये गए लेकिन, लाए गए शवों की संख्या में कोई अचानक वृद्धि नहीं हुई है।

खबर के अनुसार, महू नाका कब्रिस्तान में 46 शवों को पिछले महीने लाया गया था लेकिन केवल अप्रैल महीने में ही 42 शवों लाया गया था। इसी तरह, रानीपुरा कब्रिस्तान में लाए गए शवों की संख्या पिछले महीने 20 थी, लेकिन  इस महीने में 5 अप्रैल तक में ही 20 शवों को कब्रिस्तान में लाया गया था। खजराना कब्रिस्तान में भी, शवों की संख्या में वृद्धि हुई है पिछले महीने, कुल 28 शव कब्रिस्तान में लाए गए थे, लेकिन इस महीने के पांचवें दिन तक 21 शव लाए गए थे।

हालांकि, सबसे ज्यादा चिंताजनक मामला टाटपट्टी बाखल कब्रिस्तान का है- यह उसी इलाके में स्थित है, जहां स्वास्थ्यकर्मियों की एक टीम पर एक भीड़ ने हमला किया गया था।

मुस्लिम कब्रिस्तानों पर आने वाले शवों की संख्या में वृद्धि 59 तब्लीगी जमात कार्यकर्ताओं की पहचान के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं, जो दक्षिण दिल्ली के  निज़ामुद्दीन क्षेत्र में मरकज़ में 8,000 उपदेशकों की सभा में  शामिल हुए थे।

तबलिगियों ने कई राज्यों जैसे असम, तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, कश्मीर, तेलंगाना और महाराष्ट्र में कोरोना फैला दिया है जिससे भारत में कोरोना पॉज़िटिव मामलों में अचानक भरी उछाल आया था। अब ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश राज्य तब्लीगी जमात के आतंक से नहीं बच पाया है।

इसके अलावा, जागरण के अनुसार, एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति को कोरोना के लक्षण थे और उसका यात्रा इतिहास भी रहा था, फिर भी उसके नमूने नहीं लिए गए थे। जब उसने दम तोड़ दिया, तब भी उसके नमूने नहीं लिए गए।

स्पष्ट है ये इंदौर में COVID-19 के कारण मरने वाले लोगों के संभावित मामलों के मुद्दो को दर्शाता है , फिर इन्हें साधारण कब्रिस्तानों में दफन किया जा रहा है, और वह भी बिना किसी सावधानी के।

इंदौर संक्रमण मामले में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया। उसके आगे दो करोड़ की आबादी वाले मुंबई (642) और दिल्ली (550) ही हैं। इंदौर जिले की आबादी 34 लाख है।

कोरोना मरीजों की संख्या इंदौर में लगातार बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद वहां के लोग मानने को तैयार नहीं हैं। सरकारी निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए लोगों की भीड़ सड़कों पर जमा हो रही है।

इंदौर के चंदन नगर इलाके में पुलिस ने ऐसे लोगों को जब घर जाने को कहा तो इन लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसमें एक जवान घायल हुआ है। हमला करने वाले लोगों की तलाश शुरू हो गई है, अभी तक 7 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

टाटपट्टी बाखल के बाद इंदौर के चंदन नगर इलाके में पुलिस जवान पर पथराव हुआ है। घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें भागते हुए जवान पर युवक पथराव कर रहे हैं।

पिछले कुछ दिनों से इंदौर की हालत बिगड़ने लगी है और अगर समय रहते इसे काबू नहीं किया गया तो यह हॉटस्पॉट बन सकता है जहां से कोरोना के कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ जाएगा।