कोरोना से मौत होने पर शव नहीं ले जा सकेगा परिवार, आगे का सारा काम और इंतजाम करेगी सरकार

0
79

हरियाणा सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए कहा है कि निकट भविष्य में किसी व्यक्ति की कोरोना से मृत्यु होती है तो उसका शव परिजनों को नहीं दिया जाएगा। मृतक के धर्म अनुसार उसकी अंतिम क्रियाओं की जिम्मेदारी सरकार की होगी। रविवार को इस संबंध में स्थानीय निकाय विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।

हरियाणा में अब तक कोरोना से एक व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है। विदेशों में रहने वाले हरियाणवी मूल के लोगों की कोरोना से मौत होने के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम रस्में तो की, लेकिन शव नहीं मंगवाए। जिसके चलते सरकार ने इटली, ब्रिटेन, जर्मनी आदि देशों का अध्ययन किया तो पता चला कि वहां पर भी कोरोना रोगियों की मृत्यु के बाद संस्कार सरकार द्वारा ही करवाया जा रहा है।

इसी के चलते रविवार को स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने अधिकारियों की बैठक के बाद बताया कि हरियाणा में कोरोना पॉजिटिव के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि अधिक संख्या मरकज से आए जमातियों की है। जिला प्रशासन व निकाय अधिकारियों को कहा गया है कि वे शमशानघाट और कब्रिस्तान के संचालकों को भी इस बारे में सूचित करें। शमशानघाट और कब्रिस्तान सेनेटाइज करवाने को भी कहा गया है।

निकायों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को संस्कार का जिम्मा सौंपा जाएगा। जो भी कर्मचारी संस्कार क्रिया को पूरा करेंगे, उन्हें पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट) किट मुहैया करवाई जाएगी। इतना ही नहीं, सरकार ऐसे कर्मचारियों को इन्सेंटिव भी देगी। संस्कार करने वाले कर्मचारियों को कितना प्रोत्साहन मिलेगा, इसकी घोषणा सरकार अगले सप्ताह कर सकती है। हिंदुओं का श्मशानघाट में दाह-संस्कार होगा। वहीं मुसलमानों को कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि प्रदेश में कोरोना वायरस को फैलने से अभी तक रोका हुआ है। लॉकडाउन की भी सख्ती से पालना हो रही है। सरकार बुरी से बुरी स्थिति के लिए तैयार है। प्रदेश के कई शहरों में इलैक्ट्रॉनिक शवदाह गृह हैं। अगर कोरोना से किसी की मौत होती है तो उसका संस्कार इसी में करवाना प्राथमिकता रहेगी। अगर किसी शहर में यह सुविधा नहीं है तो लकडिय़ों से दाह-संस्कार होगा।