राजनीति

एक हफ्ते में करप्शन पर दूसरा 56 इंची प्रहार, ‘कुकर्मी’ अफसरों को बिना जांच बिठाया घर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी 30 मई को ही प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और शपथ लेने के बाद दूसरे ही दिन से वह एक्शन में आ गये थे. उनके एक्शन का प्रभाव भी अब दिखने लगा है. पहले तो 11 जून को पीएम ने वित्त मंत्रालय के नियम 56 का उपयोग करते हुए भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़ी कार्यवाही की और उन्हें रिटायरमेंट का लेटर थमाकर घर भेज दिया. मंगलवार, 18 जून को फिर सरकार ने वित्त मंत्रालय के 15 सीनियर अफसरों को जबरन रिटायर करने का निर्णय लिया. इनमें मुख्य आयुक्त, आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार, घूसखोरी के आरोप हैं.

वित्त मंत्रालय के नियम 56 के तहत जिन वरिष्ठ अधिकारियों पर इस बार रिटायरमेंट का चाबुक चलाया गया है उनके नाम और इस प्रकार हैं : प्रिंसिपल कमिश्नर डॉ. अनूप श्रीवास्तव, कमिश्नर अतुल दीक्ष‍ित, कमिश्नर संसार चंद, कमिश्नर हर्षा, कमिश्नर विनय व्रिज सिंह, अडिशनल कमिश्नर अशोक महिदा, अडिशनल कमिश्नर वीरेंद्र अग्रवाल, डिप्टी कमिश्नर अमरेश जैन, ज्वाइंट कमिश्नर नलिन कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस पाब्ना, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस बिष्ट, असिस्टेंट कमिश्नर विनोद सांगा, अडिशनल कमिश्नर  राजू सेकर डिप्टी कमिश्नर अशोक कुमार असवाल और असिस्टेंट कमिश्नर मोहम्मद अल्ताफ.

वित्त मंत्रालय के नियम 56 की यह विशेषता है कि इस नियम के अंतर्गत ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है जिनकी उम्र 50 से 55 वर्ष हो, जो नॉन परफॉर्मर हों और 30 साल की नौकरी पूरी कर चुके हों. इस प्रकार मोदी सरकार ने नियम 56 का प्रयोग करके भ्रष्ट अधिकारियों को अपनी 56 इंच की छाती का नमूना दिखा दिया है.

मोदी सरकार की भ्रष्ट नौकरशाही के विरुद्ध की गई सर्जिकल स्ट्राइक की यह कार्यवाही दर्शाती है कि मोदी सरकार ने देश में ही स्वच्छता अभियान शुरू नहीं किया है, बल्कि अब सरकारी महकमे में भी उन्होंने सफाई अभियान जोर-शोर से शुरू कर दिया है. मोदी सरकार-2 भ्रष्ट और दुराचारी अधिकारियों के विरुद्ध मुखर होकर कड़े कदम उठाने वाली है और इसमें वह किसी के साथ भी कोई ढील बरतने वाली नहीं है. ये बात और है कि मोदी सरकार की इस कार्यवाही से सरकारी बाबुओं में खलबली मची हुई है.

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