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हिंदी का सौभाग्य है मोदी और ट्रंप की 24 सेकेंड की ये क्लिप.. जय हो

G7 के मंच से आई पीएम मोदी और प्रेसीडेंट ट्रंप की 24 सेकेंड की ये क्लिप हिंदी का सौभाग्य है। हम भी वाकई अजीब हैं। जन्म से हिंदी बोलते आए हैं और जन्म से ही खुद को हिंदी बोलने के लिए कोसते आए हैं। अंग्रेज 15 अगस्त को ये जमीन तो आज़ाद कर गए पर हमारे दिलो-दिमाग को अंग्रेजी की कुंठा से पाट गए।

रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन अपने हर इंटरव्यू, हर बातचीत, हर संवाद में रूसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। हम उनके आगे नतमस्तक हो जाते हैं। वे अमेरिका की एनबीसी चैनल की पत्रकार मेगन केली को इंटरव्यू देते समय अंग्रेजी में पूछे गए हर सवाल का रूसी में जवाब देते हैं। हम वाह वाह करते हुए रूसी स्वाभिमान की बारिश में लहालोट हो जाते हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग व्हाइट हाउस में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ प्रेस कॉंफ्रेंस करते हुए हर सवाल का चीनी भाषा मे जवाब देते हैं। हम चीन, चीन, चीन चिल्लाते हुए खुशी में अपने अपार्टमेंट की पांचवी मंजिल से लगभग छलांग लगाने की कगार पर पहुंच जाते हैं।

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ज्वाइंट प्रेस कॉंफ्रेस करते हुए जापानी भाषा में ही अपनी बात रखते हैं, हर सवाल का जवाब देते हैं। हम जापानियों के गर्व और उनके राष्ट्रीय स्वाभिमान की बात करते हुए राजकपूर के जमाने के जापानी जूते को अपने सिर का ताज समझ लेते हैं। मगर जब हमारा अपना प्रधानमंत्री विकास के अमेरिकी गर्व के सामने हिंदी भाषा के स्वाभिमान का हिमालय स्थापित कर देता है तो हम कुंठा और वितृष्णा से भर उठते हैं। हमें इस बात की कोफ्त होने लगती है कि पीएम ने ट्रंप के आगे अंग्रेजी में बात क्यों नहीं की? अरे आती ही नही होगी अंग्रेजी तो क्या खाक बात करेंगे? हमारी बासी सोच का तालाब बस यहीं आकर जम जाता है!

G7 के मंच से आई पीएम मोदी और प्रेसीडेंट ट्रंप की 24 सेकेंड की ये क्लिप हिंदी का सौभाग्य है। हम भी वाकई अजीब हैं। जन्म से हिंदी बोलते आए हैं और जन्म से ही खुद को हिंदी बोलने के लिए कोसते आए हैं। अंग्रेज 15 अगस्त को ये जमीन तो आज़ाद कर गए पर हमारे दिलो-दिमाग को अंग्रेजी की कुंठा से पाट गए। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन अपने हर इंटरव्यू, हर बातचीत, हर संवाद में रूसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। हम उनके आगे नतमस्तक हो जाते हैं। वे अमेरिका की एनबीसी चैनल की पत्रकार मेगन केली को इंटरव्यू देते समय अंग्रेजी में पूछे गए हर सवाल का रूसी में जवाब देते हैं। हम वाह वाह करते हुए रूसी स्वाभिमान की बारिश में लहालोट हो जाते हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग व्हाइट हाउस में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ प्रेस कॉंफ्रेंस करते हुए हर सवाल का चीनी भाषा मे जवाब देते हैं। हम चीन, चीन, चीन चिल्लाते हुए खुशी में अपने अपार्टमेंट की पांचवी मंजिल से लगभग छलांग लगाने की कगार पर पहुंच जाते हैं। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ज्वाइंट प्रेस कॉंफ्रेस करते हुए जापानी भाषा में ही अपनी बात रखते हैं, हर सवाल का जवाब देते हैं। हम जापानियों के गर्व और उनके राष्ट्रीय स्वाभिमान की बात करते हुए राजकपूर के जमाने के जापानी जूते को अपने सिर का ताज समझ लेते हैं। मगर जब हमारा अपना प्रधानमंत्री विकास के अमेरिकी गर्व के सामने हिंदी भाषा के स्वाभिमान का हिमालय स्थापित कर देता है तो हम कुंठा और वितृष्णा से भर उठते हैं। हमें इस बात की कोफ्त होने लगती है कि पीएम ने ट्रंप के आगे अंग्रेजी में बात क्यों नहीं की? अरे आती ही नही होगी अंग्रेजी तो क्या खाक बात करेंगे? हमारी बासी सोच का तालाब बस यहीं आकर जम जाता है!अफसोस! हम आज तलक हिंदी को हीन समझने की इसी सनातन कुंठा में जी रहे हैं। तन्ख्वाह में एक भी रूपया लिए बगैर आज तक अंग्रेजों की मुफ्त गुलामी कर रहे हैं। भाषाई ठहराव के इसी थके हुए और कुंठित माहौल में 24 सेकेंड की ये वीडियो क्लिप हिंदी के विश्वव्यापी गर्व का परचम बनकर सामने आई है। पश्चिम की थकी, ठहरी हवाओं के बीच पुरवाई का खूबसूरत सुकून बनकर आई है। इस देश ने अटल बिहारी वाजपेयी को बतौर विदेश मंत्री साल 1977 में संयुक्त राष्ट्र के सीने पर हिंदी में भाषण का गर्व अंकित करते देखा था। ये देश आज प्रधानमंत्री मोदी को एक बार फिर से उसी हिंदी को विश्व की सबसे बड़ी ताकत के आगे विश्वविजय का तमगा पहनाते हुए देख रहा है। ये हिंदी के गर्व का दिन है। ये हिंदुस्तान के गर्व का दिन है। ये हमारी शाश्वत पहचान के गर्व का दिन है। जय हो।

Gepostet von Abhishek Upadhyay am Montag, 26. August 2019

अफसोस! हम आज तलक हिंदी को हीन समझने की इसी सनातन कुंठा में जी रहे हैं। तन्ख्वाह में एक भी रूपया लिए बगैर आज तक अंग्रेजों की मुफ्त गुलामी कर रहे हैं। भाषाई ठहराव के इसी थके हुए और कुंठित माहौल में 24 सेकेंड की ये वीडियो क्लिप हिंदी के विश्वव्यापी गर्व का परचम बनकर सामने आई है। पश्चिम की थकी, ठहरी हवाओं के बीच पुरवाई का खूबसूरत सुकून बनकर आई है। इस देश ने अटल बिहारी वाजपेयी को बतौर विदेश मंत्री साल 1977 में संयुक्त राष्ट्र के सीने पर हिंदी में भाषण का गर्व अंकित करते देखा था। ये देश आज प्रधानमंत्री मोदी को एक बार फिर से उसी हिंदी को विश्व की सबसे बड़ी ताकत के आगे विश्वविजय का तमगा पहनाते हुए देख रहा है। ये हिंदी के गर्व का दिन है। ये हिंदुस्तान के गर्व का दिन है। ये हमारी शाश्वत पहचान के गर्व का दिन है। जय हो।

ये लेख वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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