उत्तर प्रदेश

सुहाग नगरी के समीकरण: समाजवादी चाचा-भतीजे की जंग, पहली बार खिल सकता है कमल

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फिरोजाबाद । विश्व में सुहाग की प्रतीक चूड़ियों के लिये मशहूर फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर 1998 के चुनाव के बाद से कमल नहीं खिला है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने प्रो. एस पी सिंह बघेल को उम्मीदवार बनाकर कमल खिलाने का सपना देखा था, लेकिन मोदी लहर के बाद भी कमल नहीं खिल सका। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर सैफई परिवार के दो दिग्गज शिवपाल यादव व अक्षय यादव ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे में बीस साल बाद पार्टी कमल खिलाने के लिये जातिगत आंकड़ों के आधार पर किसी दमदार प्रत्याशी की तलाश कर उसे चुनाव मैदान में उतार सकती है। टिकट किसे मिलेगा यह तो पार्टी तय करेगी लेकिन सोशल मीड़िया पर समर्थक अपने अपने चहेते दावेदारों के नाम उछाल रहे हैं।

भाजपा ने लगायी थी जीत की हैट्रिक

सुहाग नगरी की इस लोकसभा सीट पर साल 1991 में भाजपा ने पहली बार चुनाव जीता था। राम लहर में भाजपा फिरोजाबाद सीट से कमल खिलाने में सफल हुई थी। 1996 के आम चुनाव और 1998 के उपचुनाव में भी भाजपा के प्रभूदयाल कठेरिया ने जीत दर्ज करायी और वह लगातार तीन बार सांसद बने। इस तरह उन्होंने जीत की हैट्रिक लगायी।

1998 के बाद नहीं खिला कमल

1999 के उपचुनाव में भाजपा के प्रभूदयाल कठेरिया को सपा के रामजीलाल सुमन ने पराजित कर दिया। 2004 के आम चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी व आगरा के पूर्व मेयर किशोरी लाल माहौर को हार का सामना करना पड़ा। 2009 के उप चुनाव में कांग्रेस के राजबब्बर के सामने भी भाजपा के भानुप्रताप सिंह को पराजय मिली इस चुनाव में भाजपा जमानत भी नहीं बचा सकी। 2014 में भाजपा ने प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल को चुनाव में मैदान में उतारा था लेकिन बघेल कड़ा मुकाबला करने के बाद भी सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव से चुनाव हार गए थे।

जातीय समीकरणों के आधार पर प्रत्याशी की खोज

भाजपा लोकसभा 2019 का चुनाव भी 2014 की तरह मोदी के नाम पर लड़ रही है, ऐसे में इस सीट से टिकट के दावेदार लखनऊ और दिल्ली के दिग्गज भाजपा नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक फिरोजाबाद सीट पर भाजपा जातीय समीकरणों के आधार पर ऐसे चेहरे पर दांव लगाने का मन बना रही है, जिससे पार्टी को एक मुश्त वोट बैंक के साथ अन्य वोट भी मिल सके। ऐसे में पार्टी पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग में उम्मीदवार खोज रही है। यदि पार्टी हाईकमान इस सीट पर सवर्ण कार्ड खेलती है तो तो ब्राह्मण या क्षत्रीय समाज से जुड़े उम्मीदवार को भी चुनाव मैदान में उतार सकती है।

टिकट के इन दावेदारों के नाम सुर्खियों में

फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर टिकट के दावेदारों में कबीना मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल का नाम सबसे ऊपर था क्योंकि वह 2014 के लोकसभा चुनाव में भी प्रत्याशी थे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने उन्हे आगरा से प्रत्याशी बनाकर उनके इस सीट पर चुनाव लड़ने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। अब इस सीट से पूर्व मंत्री भाजपा नेता ठाकुर जयवीर सिंह, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वीएल वर्मा, वर्तमान जिलाध्यक्ष मानवेंद्र प्रताप सिंह लोधी, सदर विधायक मनीष असीजा, डाॅ. एसपी लहरी, राज्यसभा सांसद डाॅ. अनिल जैन के भाई नानक चंद्र अग्रवाल, पूर्व जसराना विधायक व भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष अमोल यादव के पिता रामवीर सिंह यादव, भाजपा के लोकसभा क्षेत्र संयोजक डॉ. रामकैलाश यादव का नाम सुर्खियों में चल रहा है।

वर्तमान में पार्टियों के प्रत्याशी और सियासी समीकरण

इस बार सपा-बसपा गठबंधन ने फिरोजाबाद के मौजूदा सांसद एवं सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव को प्रत्याशी बनाया है। जबकि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव स्वयं यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने सैफई परिवार के अक्षय यादव के सामने प्रत्याशी नहीं उतारने का ऐलान कर दिया है। इस तरह कांग्रेस का कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है। वहीं बसपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे चौधरी बशीर भी इसी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
ऐसे में सभी की निगाहें भाजपा की ओर टिकी हैं। इससे तय हो जाएगा कि क्या सियासी समीकरण बनेंगे। वहीं इस चुनावी जंग में सैफई परिवार के चाचा-भतीजे के बीच दिलचस्प मुकाबला भी देखने लायक होगा। अगर भाजपा स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए दमदार उम्मीदवार खड़ा करती है तो चाचा-भतीजे की आपसी वोटबैंक की लड़ाई में पार्टी को इसका फायदा मिल सकता है।

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