Breaking News
Home / ख़बर / राजनीति / धारा 370 हटे बीता एक ही महीना, मोदी ने वादी में बहा दी ‘विकास’ की नई धारा

धारा 370 हटे बीता एक ही महीना, मोदी ने वादी में बहा दी ‘विकास’ की नई धारा

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाते समय ही मोदी सरकार ने साफ शब्दों में कह दिया था कि यह धारा जम्मू कश्मीर के विकास में बाधक है। यह धारा हटाने के बाद केन्द्र सरकार जम्मू कश्मीर में अपनी विकास योजनाओं को लागू कर सकेगी। धारा हटने के एक महीने बाद ही मोदी सरकार ने अपने वायदों पर अमल करना शुरू कर दिया है और विकास की धारा को कश्मीर की तरफ मोड़ दिया है। सरकार ने कश्मीर घाटी में सेब की खेती करने वाले 33 लाख किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिये उनसे सेब खरीदने की 8,000 करोड़ रुपये की मार्केट इंटरवेंशन प्राइस स्कीम (MIPS) लागू करने की तैयारी की है। यह योजना लागू होने से सेब की खेती करने वाले कश्मीरी किसानों को ही 8,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा और यह रकम सीधे उनके खातों में जमा होगी।

क्या है एमआईपीएस और कैसे लागू होगी ?

दरअसल कश्मीरी सेब की विदेशों में काफी माँग है। इसलिये केन्द्र सरकार के कृषि मंत्रालय और NAFED ने कश्मीरी किसानों से उनके सेब खरीदने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत केन्द्र सरकार कश्मीरी किसानों से बारामूला, श्रीनगर, शोपियाँ और अनंतनाग की मंडियों से सेब खरीदेगी और पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा करेगी। सेब खरीदने के लिये सरकार एक कमेटी बनाएगी, जो सेब की तीन श्रेणियाँ सुनिश्चित करेगी। ए, बी और सी कैटेगरी के सेबों की अलग-अलग खरीद कीमत तय की जाएगी। इसी तय कीमत पर सरकार नाफेड के माध्यम से मंडियों से सेब के व्यापारियों और सीधे किसानों से भी सेब खरीदेगी और विदेशों में निर्यात करेगी। केन्द्र सरकार ने कश्मीरी किसानों से सेब खरीदने के लिये 8,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है।

इस कमेटी की अगुआई जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव करेंगे। सोमवार को मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने कश्मीर डिवीज़न के डिप्टी कमिशनर समेत कई बड़े अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें केन्द्र सरकार की ओर से चलाई जा रही उपरोक्त मार्केट इंटरवेंशन प्राइस स्कीम की चर्चा की और इसे जम्मू कश्मीर में सेब की खेती करने वाले किसानों के लिये लागू करने की बात की। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के लागू होने से कश्मीरी किसानों को सीधा लाभ होगा। उनके सेबों की खपत बढ़ेगी और सेब की सप्लाई भी होगी। खास बात यह कि पैसा सीधे किसानों के खाते में जाएगा, जिसके लिये राज्य सरकार से किसानों के खातों की जानकारी प्राप्त की जाएगी। बैठक में हुई चर्चा के अनुसार शुरुआती दौर में किसानों से 1 सितंबर-2019 से लेकर अगले वर्ष 1 मार्च-2020 तक सेब की खरीद की जाएगी। इन छह महीनों के दौरान सेब खरीदने के लिये लगभग 8,000 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया है।

घाटी के किसानों को क्या लाभ होगा ?

कश्मीर घाटी में सेब के कारोबार का वार्षिक टर्नओवर लगभग 6,500 करोड़ रुपये है। अब केन्द्र सरकार ने भी 8,000 करोड़ रुपये के सेब खरीदने की योजना बनाई है। इससे सेब के कारोबार का वार्षिक टर्नओव्हर बढ़कर 14,500 करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा। घाटी में कम से कम 33 लाख लोग इस कारोबार से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। घाटी में हर वर्ष लगभग 1.45 लाख हेक्टेयर भूमि में 3.62 करोड़ सेब के पेड़ों से लगभग 20 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। केन्द्र सरकार की ओर से सेब की खरीद कीमत तय किये जाने से किसानों को सीधा फायदा होगा और सेब खरीदने वाले व्यापारियों को भी उसी कीमत से सेब खरीदने पड़ेंगे। इस प्रकार कश्मीरियों के पास अपना उत्पादन सरकार या व्यापारियों में से जिसका दाम अधिक हो, उसे बेचने का विकल्प मिलेगा। इससे उनकी उपज का उन्हें उचित मूल्य मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com