Navratri 2018: माँ सप्तशती के प्रत्येक पाठ में छुपा है इन सभी समस्याओं का हल

हिंदू सनातन संस्कृति में ऋषि-मुनियों ने अपने ज्ञान और ईश्वर प्रदत्त शक्तियों के जरिए मानव जीवन की समस्त समस्याओं का तलाशा और उन्हें आम मनुष्य के लिए उपलब्ध करवाया। वेदों से लेकर बाद में आए समस्त ग्रंथों में कहीं न कहीं यह समस्याओं के निदान का मार्ग होता ही है।

ऐसा ही एक पवित्र ग्रंथ है दुर्गा सप्तशती

देवी दुर्गा की महिमा का वर्णन करने वाले इस प्रमुख ग्रंथ में कुल 13 अध्याय हैं और प्रत्येक अध्याय का पाठ करने से किसी न किसी समस्या का हल मिलता है। भुवनेश्वरी संहिता में कहा गया है जिस प्रकार वेद अनादि हैं, उसी प्रकार सप्तशती भी अनादि हैं। दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों में कुल 700 श्लोक समाहित हैं।

आइये चैत्र नवरात्रि के मौके पर जानते हैं दुर्गा सप्तशती के विभिन्न् अध्यायों का महत्व और उनसे मिलने वाले समस्त समस्याओं के निदान के बारे में…

 शत्रुओं का नाश होता है..शत्रुओं का नाश होता है..

प्रथम अध्याय : इसके पाठ से सभी प्रकार की चिंता दूर होती है एवं शक्तिशाली शत्रु का भी भय दूर होता है। शत्रुओं का नाश होता है।

द्वितीय अध्याय : इसके पाठ से बलवान शत्रु द्वारा घर एवं भूमि पर अधिकार करने एवं किसी भी प्रकार के वाद विवाद आदि में विजय प्राप्त होती है।

तृतीय अध्याय : तृतीय अध्याय के पाठ से मुकदमे में विजय मिलती है। शत्रुओं से छुटकारा मिलता है। चतुर्थ अध्याय : इस अध्याय के पाठ से धन, सुंदर जीवनसाथी एवं मां की भक्ति की प्राप्ति होती है।

भय, बुरे स्वप्नों और भूत प्रेत बाधाओं का निराकरण होता है

भय, बुरे स्वप्नों और भूत प्रेत बाधाओं का निराकरण होता है

पंचम अध्याय : पंचम अध्याय के पाठ से भक्ति की भावना प्रबल होती है। भय, बुरे स्वप्नों और भूत प्रेत बाधाओं का निराकरण होता है।

छठा अध्याय : इस अध्याय के पाठ से समस्त कार्य बाधाएं दूर होती है और समस्त इच्छित फलों की प्राप्ति होती है।

सातवां अध्याय : इस अध्याय के पाठ से ह्रदय की समस्त कामना अथवा किसी विशेष गुप्त कामना की पूर्ति होती है।

आठवां अध्याय : अष्टम अध्याय के पाठ से धन लाभ के साथ आकर्षण प्रभाव में वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति किसी को भी वश में कर लेता है।

संपत्ति एवं धन का लाभ भी प्राप्त होता है

संपत्ति एवं धन का लाभ भी प्राप्त होता है

नौवां अध्याय : नवम अध्याय के पाठ से खोए हुए की तलाश में सफलता मिलती है, संपत्ति एवं धन का लाभ भी प्राप्त होता है।

दसवां अध्याय : इस अध्याय का पाठ करने से गुमशुदा व्यक्ति को लौटा लाया जा सकता है। शक्ति और संतान का सुख भी प्राप्त होता है।

ग्यारहवां अध्याय : ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने से किसी भी प्रकार की चिंता से मुक्ति , व्यापार में सफलता एवं सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है।

बारहवां अध्याय : इस अध्याय के पाठ से रोगों से छुटकारा, निर्भयता की प्राप्ति होती है एवं समाज में मान-सम्मान मिलता है। तेरहवां अध्याय :

तेरहवें अध्याय के पाठ से माता की भक्ति एवं सभी इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति होती है।

जाग्रत तंत्र विज्ञान है दुर्गा सप्तशती

जाग्रत तंत्र विज्ञान है दुर्गा सप्तशती

दुर्गा सप्तशती एक जाग्रत तंत्र विज्ञान है। इसके श्लोकों का पाठ करने से अच्छा या बुरा फल तीव्र गति से प्राप्त होता है। इसलिए इसके पाठ में विशेष सावधानी और ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति श्लोकों का सही उच्चारण न कर पाए, वह इसे बिलकुल न पढ़ें अन्यथा विपरीत प्रभाव भी हो सकता है। दुर्गा सप्तशती में में अलग-अलग जरूरतों के अनुसार अलग-अलग श्लोकों को रचा गया है, जिसके अंतर्गत मारण क्रिया के लिए 90, मोहन यानी सम्मोहन क्रिया के लिए 90, उच्चाटन क्रिया के लिए 200, स्तंभन क्रिया के लिए 200 व विद्वेषण क्रिया के लिए 60-60 मंत्र हैं।

शिव ने शापित कर रखा है सप्तशती को

शिव ने शापित कर रखा है सप्तशती को

दुर्गा सप्तशती के सभी मंत्र बहुत प्रभावशाली हैं। इस ग्रंथ के मंत्रों का दुरूपयोग न हो, इसलिए भगवान शंकर ने इस ग्रंथ को शापित कर रखा है। जब तक इस ग्रंथ को शापोद्धार विधि का प्रयोग करते हुए शाप मुक्त नहीं किया जाता, तब तक इस ग्रंथ में लिखे किसी भी मंत्र तो सिद्ध यानी जाग्रत नहीं किया जा सकता और जब तक मंत्र जाग्रत न हो, तब तक उसे मारण, सम्मोहन, उच्चाटन आदि क्रिया के लिए उपयोग में नहीं लिया जा सकता। हालांकि इस ग्रंथ का नवरात्रि के दौरान सामान्य तरीके से पाठ करने पर पाठ का जो भी फल होता है, वो जरूर प्राप्त होता है, लेकिन तांत्रिक क्रियाओं के लिए यदि इस ग्रंथ का उपयोग किया जा रहा हो, तो उस स्थिति में पूरी विधि का पालन करते हुए ग्रंथ को शापमुक्त करना जरूरी है।