उत्तर प्रदेश

सदियों पुरानी परंपरा टूटने से मायूसी, महंगाई ने निकलने न दी होली के दूल्हे की बारात

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हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक गांव में होली के दूल्हे की बारात निकालने की सैकड़ों साल पुरानी परम्परा गुरुवार को टूट गयी। ग्रामीणों से कोई मदद न मिलने के कारण गांव के सरपंच ने यह अनोखा कार्यक्रम कराने से इंकार कर दिया है। इसे लेकर गांव में मायूसी देखी जा रही है।

बुन्देलखण्ड के हमीरपुर जिले के जरिया एक ऐसा गांव है जहां होली पर्व पर होली के दूल्हे की बारात निकालने की परम्परा सैकड़ों सालों से चली आ रही थी। यह गांव होली के अनोखे कार्यक्रम के लिये पूरे क्षेत्र में विख्यात रहा है। गांव में एक युवक को दूल्हा बनाकर घोड़े में बैठाकर पूरे गांव में बारात बैण्डबाजे के साथ निकाली जाती रही है।

घोड़े पर सवार दूल्हे का घर-घर टीका कर उसकी आरती भी उतारी जाती रही है। गांव के देव स्थानों पर होली का दूल्हा माथा भी टेकता था फिर धूमधाम से उसकी बारात शोभायात्रा के रूप में निकलने की परम्परा थी। इस अनोखे कार्यक्रम को देखने के लिये आस-पास के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ भी उमड़ती थी,मगर गुरुवार के दिन यह परम्परा टूट गयी। होली के दूल्हे की बारात निकालकर होली मनाने से गांव के सरपंच ने साफ इंकार कर दिया है।

सरपंच रामस्वरूप ने बताया 

पिछली बार होली के दूल्हे की बारात निकालकर अनोखा कार्यक्रम सम्पन्न कराने में खुद की जेब से बड़ी धनराशि खर्च हुयी थी जिसमें गांव के किसी भी व्यक्ति ने कोई मदद नहीं की थी जबकि गांव के सभी लोगों के सहयोग से यह परम्परा धूमधाम से निभायी जाती रही है। होली के दूल्हे की बारात को लेकर जरिया पुलिस भी गांव पहुंची, जहां कार्यक्रम न होने से पुलिस लौट आयी।

जरिया थाने के इंस्पेक्टर रामजीत गौड़ ने बताया कि इस गांव में होली के दूल्हे की बारात निकालने की परम्परा बहुत पुरानी थी जिसे ग्राम प्रधान रामस्वरूप ने इस बार कराने से मना कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रधान को गांव से कोई मदद न मिलने के कारण यह कार्यक्रम कराने से हाथ खड़े कर दिये है।

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