जरा हट के

टैक्सी बेचकर ड्राईवर ने कराया था जिसका इलाज, बदले में उस लड़की ने किया कुछ ऐसा !

सुबह जब हम अखबार उठाते हैं, तो हमे तमाम तरह की खबरों तो मिलती ही है, इसके साथ ही साथ हमे हर दिन सड़क दुर्घटना की भी खबर मिलती है। जो अब सभी के लिए मानो आम सी हो गई है। आपको अखबार में यह तो हर दिन देखने को मिल जाएगा कि आए दिन कितनी दुर्घटनाएं हो रही है, जो आधे से ज्यादा सड़क पर ही होते हुए दिखाई देते है। आपने कभी यह देखा ही होगा कि जब भी सड़क हादसे होते हैं तो बहुत ही ऐसे कम लोग होते हैं। जो अपने समय में से कुछ समय निकालकर सड़क हादसे में पीड़ित व्यक्ति की मदद करते हैं।

आज हम आपको एक ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहे जिसमे एक लड़की सड़क हादसे का शिकार हो गई। यहाँ खकरसबसे ज्यादा हैरानी वाली बात ये थी की किसी ने भी उसकी ओर कदम नही पढ़ाया लेकिन एक टैक्सी वाले को यह नही देखा गया। तो वो उसकी जान बचाने के लिए अस्पताल ले कर गया और इतना ही नही उसने अपनी टैक्सी बेच कर जान उस लड़की की जान बचाई। जी हां, आपको बता दे कि यह घटना सहारनपुर की है। जिसमें सड़क हादसे में घायल एक लड़की की जान बचाने के लिए सहारनपुर के एक टैक्सी वाले ने अपनी टैक्सी बेच करके उसकी जान बचाई।

आपको बता दे कि टैक्सी वाला इतना गरीब है कि उसकी रोजी रोटी टैक्सी से ही चलती थी, अपनी टैक्सी बेचने के बाद वह दाने-दाने का मोहताज हो गया। आपको बता दे कि इस टैक्सी चालक का नाम राजवीर है। हाल ही में उसने नई टेक्सी खरीदी थी और एक दिन सड़क पर गुजरते हुए उसने देखा कि एक खूबसूरत लड़की सड़क पर खून से लथपथ पड़ी हुई तड़प रही थी। ऐसे में राजवीर ने उस लड़की को तुरंत टैक्सी में बिठाया और अस्पताल लेकर चला गया। अस्पताल पहुंचते ही राजीव को डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन के लिए दो लाख रुपयो की जरूरत पडेगी। यह सुनकर राजीव ने बिना देर किए और बिना सोचे-समझे उसने 2.5 लाख में अपनी टैक्सी बेचकर उसका ऑपरेशन करवाया और ऑपरेशन सक्सेसफुल होने के बाद वह लड़की अपने घर चली गयी।

इसके बाद एक दिन वो लड़की उसके घर पर आई जिसकी राजीव ने जांच बचाई थी और राजीव ने उसे तुरंत पहचान लिया। जिसका नाम आसीमा है। आसिमा ने उसे अपनी डिग्री के कन्वोकेशन में आने को कहा। राजवीर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। लेकिन फिर भी वह बहन ने बुलाने पर यूनिवर्सिटी में अपनी बूढ़ी मां के साथ पहुचा और हाल में वह सबसे पीछे बैठ गया। राष्ट्रपति ने पहला नाम ही आशिमा का पुकारा और आशिमा को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। लेकिन मेडल लेने के बजाय आशिमा दौड़कर राजवीर के पास पहुँची और बोली मेडल का असली हकदार मेरा भाई है और उन्होंने सारी बीति घटना सुनाई और यह सुनकर लोगों की आंखों से आंसू आ गए। इसके साथ ही उसने भाई को एक टैक्सी भी दी और इसके साथ ही वो राजीव के साथ रहने भी लगी।

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