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पांच पांडवों से विवाह के बाद भी द्रौपदी रही कुंवारी, जानिए इस रहस्य की पूरी कहानी !

अगर इतिहास की बात करे तो ये बात सब जानते है कि महाभारत में द्रौपदी का विवाह एक नहीं बल्कि पांच पांडवो से हुआ था. मगर आपको जान कर हैरानी होगी कि पांच पांडवो से विवाह होने के बावजूद भी द्रौपदी को कुंवारी माना जाता है. जी हां आप भी सोच रहे होंगे कि भला ये कैसे मुमकिन हो सकता है. बरहलाल आज हम इसी रहस्य से पर्दा उठाने वाले है. गौरतलब है कि ये उस युग की बात है जहाँ पुरुष को तो सैंकड़ो पत्निया रखने का हक़ था, लेकिन स्त्री अगर किसी अन्य पुरुष की तरफ देख भी लेती थी तो उसे अपने ही लोगो की क्रूरता का सामना करना पड़ता था.

बता दे कि इसी युग में द्रौपदी ही एक ऐसी शख्सियत थी, जिसने न केवल पांच भाईयो से विवाह किया, बल्कि महर्षि वेद व्यास ने खुद इस विवाह को संपन्न करवाया. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि द्रौपदी के पिता ने उसके विवाह योग्य होते ही स्वंयवर की घोषणा कर दी थी. जी हां ऐसे काल में जहाँ महिलाओ को अपने विवाह संबंधी विषय पर बोलने का भी हक नहीं था, वही द्रौपदी को अपना वर खुद चुनने का अवसर मिला. हालांकि द्रौपदी के पिता उसे हर बार एक लड़की और एक अनचाही बेटी होने का एहसास दिलाते रहते थे, लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने अपनी बेटी के लिए स्वयंवर रखा और द्रौपदी भी इससे बेहद खुश थी.

वही द्रौपदी ने जब स्वयंवर से जुडी शर्त के बारे में सुना तो वो समझ गई कि वर का चुनाव वो खुद नहीं बल्कि उसकी किस्मत करेगी. जी हां दरअसल द्रौपदी के पिता पांचाल नरेश द्रुपद ने यह शर्त रखी थी कि जो राजकुमार पानी में मछली की परछाई देख कर उसकी आँख पर वार करेगा, केवल वही उनकी बेटी का वर बनेगा. ऐसे में द्रौपदी के पास अपने पिता की इस शर्त को मानने के इलावा और कोई रास्ता नहीं था. बरहलाल देखते ही देखते स्वयंवर का दिन भी आ गया. गौरतलब है कि द्रौपदी काफी डरी हुई और उत्साहित थी. दरअसल उसे इस बात की चिंता सता रही थी कि अगर ऐसे इंसान ने मछली की आंख पर निशाना लगा दिया, जिसे वो पसंद न करती हो, तो उसका जीवन आगे चल कर कैसा होगा.

हालांकि स्वयंवर से पहले द्रौपदी को सभी राजकुमारों की तस्वीरें दिखाई जा चुकी थी. आपको बता दे कि इस दौरान द्रौपदी को कर्ण बेहद पसंद आये थे और मन ही मन वह उन्हें अपना पति बनाने का सपना भी देखने लगी. हालांकि जब कर्ण अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन दिखाने के लिए आगे आये तो द्रौपदी के भाई ने उन्हें ये कह कर रोक दिया कि ये स्वयंवर केवल राजकुमारों के लिए है, किसी सूतपुत्र के लिए नहीं है. इसके बाद अर्जुन सामने आये और उन्होंने इस स्वयंवर को जीत लिया. ऐसे में अर्जुन से विवाह करने के बाद जब द्रौपदी पांचो पांडवो के साथ उनके घर पहुंची, तो अर्जुन ने अपनी माँ से कहा कि देखो माँ हम क्या लाये है.

बता दे कि उनकी माँ ने बिना देखे ये कह दिया कि जो भी लाये हो उसे पांचो में बाँट लो. ऐसे में पांचो पांडव अपनी माँ का कहना नहीं टाल सकते थे, इसलिए पांचो ने पांचाली से विवाह किया और द्रौपदी को भी मजबूर होकर पांचो पांडवो को अपना पति मानना पड़ा. गौरतलब है, कि वेद व्यास ने पांचो पांडवो का विवाह संपन्न करवाया और हर भाई की सुविधा को देखते हुए उनसे ये कहा कि द्रौपदी एक एक साल के लिए हर भाई के साथ रहेगी. ऐसे में जब वो एक भाई से दूसरे भाई के पास जायेगी तो उसका कौमार्य फिर से वापिस आ जाएगा. इसके साथ ही वेदव्यास ने ये भी कहा था कि जब द्रौपदी दूसरे भाई के पास जाएगी तो बाकी भाई उसकी तरफ नजर उठा कर भी नहीं देखेंगे.

मगर शायद अर्जुन को वेदव्यास की ये शर्त और द्रौपदी का पांचो पांडवो से विवाह करना पसंद नहीं आया. यही वजह है कि वो पति के रूप में द्रौपदी के साथ कभी सामान्य नहीं थे. बरहलाल वेदव्यास की शर्त के अनुसार द्रौपदी हर साल पांच पांडवो के साथ रहती थी. वैसे इसमें कोई शक नहीं कि एक पुरुष होने के नाते पांचो पांडवो के लिए अगले चार साल तक अपनी काम वासना पर संयम रखना मुश्किल था. ऐसे में सबने द्रौपदी के इलावा अलग अलग स्त्री से विवाह कर उन्हें अपनी पत्नी बना लिया. इसमें कोई दोराय नहीं कि पांचो पांडवो से विवाह करने के बावजूद भी द्रौपदी पूरी उम्र अपने पति के सच्चे प्यार के लिए तरसती रही.

जी हां वह हर साल अपने पति की शारीरिक इच्छाएं पूरी करती रही और उनके शयन कक्ष की शोभा बनती रही. मगर वास्तव में पूरी तरह से वह किसी के दिल पर राज नहीं कर पाई. अगर सीधे शब्दों में कहे तो वेदव्यास की शर्तो ने ही द्रौपदी के जीवन को ऐसा अप्रत्याशित मोड़ दिया. बता दे कि ये वही वेदव्यास है, जिन्होंने बचपन में ही द्रौपदी से ये कहा था कि उसके पांच पति होंगे. हालांकि तब द्रौपदी ने ये कह कर इस बात को टाल दिया था कि जिस स्त्री के एक से ज्यादा पति होते है, समाज उसे कभी योग्य स्त्री नहीं समझता और साथ ही द्रौपदी ने ये भी कहा था कि उसके पिता कभी उसके साथ ऐसा नहीं होने देंगे. मगर भाग्य का लिखा, कोई नहीं बदल सकता.

बरहलाल पांच पांडवो से शादी करने के बाद भी द्रौपदी कभी सही मायनो में पत्नी का अधिकार हासिल नहीं कर पाई.

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