शरीर में इन जगहों पर अगर बना रहता है दर्द, तो ये घरेलू नुस्खे तुरंत देंगे राहत

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कंधे और जोड़ों के दर्द से काफी लोग पीडि़त हैं। ऐसी समस्या सूजन और अकडऩ से होती है। यह दर्द लंबे समय तक लोगों को परेशान करती है। ऐसा अक्सर देखा जाता है कि रात में नींद के वक्त ज्यादा दर्द होता है और नींद आने में भी समस्या होती है। सबसे बड़ी बात यह कि फ्रोजन शोल्डर की समस्या ठीक होने में समय लगता है। इस लेख में हम आपको कुछ व्यायाम बताएंगे जो कंधे के दर्द में राहत देता है।

काम करने में भी समस्या

सरल शब्दों में कहें तो फ्रोजन शोल्डर यानी कंधे का जाम हो जाना। इसमें कंधे के जोड़ के चारों ओर के ढीले बैग (कैप्सूल) में सूजन और अकडऩ आ जाती है। कई बार दर्द इतना बढ़ जाता है कि रोज के काम करने में भी समस्या होने लगती है। फ्रोजन शोल्डर के कई कारण हो सकते हैं। प्राइमरी फ्रोजन शोल्डर का सटीक कारण ज्ञात नहीं है। मधुमेह, थाइरॉएड ग्रंथि, पार्किंसन व हृदय रोगों से परेशान लोगों में इसके मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं।

यह भी है कारण

सेकेंडरी फ्रोजन शोल्डर में वो मामले आते हैं, जो कंधे को देर तक एक ही तरह से रखने के कारण होते हैं, जैसे किसी बीमारी (स्ट्रोक या दिल के दौरे की स्थिति में) कंधे का एक ही स्थिति में टिके रहना। कई बार कंधे के हिस्से में चोट लगने या सर्जरी के बाद भी यह समस्या हो जाती है। भारी सामान उठाने या सरकाने के कारण कंधे में हुई तकलीफ भी कई बार बढ़कर फ्रोजन शोल्डर का रूप ले लेती है। पर यह समझना जरूरी है कि कंधे की हर जकडऩ या दर्द फ्रोजन शोल्डर नहीं होते। पुरुषों की तुलना में फ्रोजन शोल्डर के मामले महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलते हैं।

उपचार के तीन चरण

1. इस चरण में तेज दर्द होता है। यह दर्दनाक चरण 2 से 9 महीने तक रह सकता है। दर्द धीरे-धीरे शुरू होता है। शुरुआत में ऊपरी बांह में दर्द होता है और बाद में नीचे तक दर्द आने लगता है। काम करना मुश्किल हो जाता है। दर्द रात में ज्यादा होता है। नींद आने में भी दिक्कत होती है।

2. दर्द में कमी पर अकड़ऩ का बढऩा। यह चरण चार से 12 माह तक रह सकता है। इस चरण में दर्द में कमी आ जाती है, पर अकडऩ बढ़ती जाती है। पीठ या सिर के पीछे हाथ ले जाने में भी दिक्कत होती है। कंधों में कसाव बना रहता है। कंधे का इस्तेमाल कम होने के कारण आसपास की मांसपेशियों में भी अकडऩ रहती है।

3. इसे रिकवरी फेस कहा जाता है। यह पांच से 28 माह तक रह सकता है। इस चरण के दौरान दर्द और कठोरता में सुधार आता है और व्यक्ति हाथ से सामान्य ढंग से काम भी करने लगते हैं। इस तरह कंधों का दर्द पूरी तरह ठीक होने में एक से डेढ़ साल तक का समय लग जाता है।

कंधों के दर्द में करें ये व्यायाम

पेंडुलम स्ट्रेच : जिस कंधे में दर्द है, उससे दूसरे हाथ की हथेली को थोड़ा आगे की ओर झुकते हुए किसी मेज या संदूक पर टिका लें। दर्द वाले कंधे की बाजू को धीरे-धीरे आगे और पीछे ले जाएं। इस व्यायाम को 5 से 10 बार करें।

ट्विस्टिंग आउटवर्ड : कुर्सी पर एक गोल डंडा लेकर सीधे बैठें। कोहनी कंधे की सीध में ही रहें। शरीर को बिना हिलाए, जिस हाथ में दर्द नहीं है, उसे इस तरह साइड की ओर ले जाए, जिससे दर्द वाली बाजू भी उस तरफ जाए। शरीर को न घुमाएं। इसे 5 से 10 बार करें।

आर्म ओवरहेड

1. पीठ के बल सीधे लेटें। जिस कंधे में दर्द है, उस हाथ की कलाई को दूसरे हाथ से पकड़कर सिर के ऊपर की ओर धीरे-धीरे ले जाएं। ऐसा करते हुए पीठ को ना उठाएं। हर रोज 5 से 10 बार करें।

2. पीठ के बल लेटकर घुटने मोड़ लें। हाथों को गर्दन के पीछे और कोहनियां छत की ओर रखें। फिर उन्हें बाहर की ओर फैलाएं। ऐसा 5 से 10 बार करें।

हैंड बिहाइंड बैक : सीधे खड़े होकर दर्द वाली बाजू की कलाई को दूसरे हाथ से पीछे की ओर पकड़ें। धीरे-धीरे बाजू को दूसरी ओर खींचें। कंधे पर स्ट्रेच महसूस होगा। ऐसा करते हुए शरीर को हिलाएं नहीं। आगे इसी व्यायाम को तौलिए के साथ कर सकते हैं। पांच बार दोहराएं।

अपवर्ड स्ट्रेचिंग : इसके लिए ऊपर की ओर रिंग या खूंटी लगानी होगी। दोनों हाथों से रस्सी के एक-एक सिरे को पकड़ लें। सही वाली बाजू से रस्सी को नीचे की ओर खींचते हुए दर्द वाले कंधे को ऊपर की ओर खिंचाव दें। ऐसा 10 बार करें।

फिंगर वॉक : सीधे खड़े होकर दर्द वाले कंधे की बाजू दीवार पर रखें। उंगलियों को चलाते हुए ऊपर ले जाएं। जितना ऊपर की ओर आसानी से ले जा सकते हैं, उतना ले जाएं।