श्राद्ध में जरूर कर लें यह उपाय, हमेशा के लिए पूर्वज हो जायेंगे मुक्त

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पूर्वजों के सम्मान का पर्व पितृपक्ष शनिवार 14 सितम्बर से प्रारंभ हो रहा है। घरों में विधि-विधान से पूर्वजों का आह्वान कर भोग लगाने के बाद पूर्वजों का आह्वान किया जाएगा।

शास्त्रों के अनुसार साल के 15 दिनों को पितरों के लिए सुरक्षित रखा गया है। इस दिन घर के बड़े-बुजुर्ग पितृपक्ष भर स्वर्गीय हो चुके बुजुर्ग का श्राद्ध करते हैं। ऐसी मान्यता है कि साल के इन 15 दिनों में स्वर्गवासी हो चुके पितर अपने मृत्यु के तिथि के अनुसार इस संसार में आते हैं। इसलिए प्रत्येक परिवार वालों द्वारा अपने मृत्यु पितरों का श्राद्ध किया जाता है।

तालाबों में अपने पितरों को कुश के माध्यम से जल अर्पण कर पूजा की जाती है। सुबह घर के आंगन में चावल के आटे से रंगोली बनाकर उस पर लकड़ी का पीढ़ा रखा जाता है। इसके साथ लोटे में पानी व दातून रखकर पूर्वजों का आह्वान करते हैं। इसके बाद पकवान व भोजन का भोग लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि पूर्वजों के लिए रखे इन खाद्य पदार्थों को अगर कौआ खा लेता है तो पूजा सार्थक मानी जाती है। पूर्वजों के पूजन में तोरई के पत्तों, सब्जी व उड़द दाल का विशेष महत्व है। इसके चलते इन सामानों  की मांग एकाएक बढ़ जाती है।

मानव के ऊपर होते हैं तीन ऋृण

शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में पितरों को जल अर्पण करने से उनकी आत्माओं को तृप्ति मिलती है। जन्म के बाद से मानव के उपर देव ऋृण, ऋृषि ऋृण व पितृ ऋृण रहता है, जिसमें पितृ ऋृण का विशेष महत्व है। पितृ ऋृण के रूप में ही पितरों का श्राद्ध किया जाता है।

इन समस्यायों को देखना होता है जीवन में

– घर-परिवार में किसी न किसी कारण झगड़ा होता रहता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव बना रहता है व मानसिक अशांति के कारण जीना दूभर हो जाता है।

– पितृ दोष होने पर परिवार का एक न एक सदस्य निरंतर रूप से बीमार रहता है। यह बीमारी भी जल्दी ठीक नहीं होती। -जिन लोगों को पितृ दोष होता है, उनकी शादी होने में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं।

– पितृ दोष होने के कारण ऐसे लोगों को हमेशा धन की कमी रहती है। किसी न किसी रूप में धन की हानि होती रहती है।

– जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है उनके यहां संतान होने में समस्याएं आती हैं। कई बार तो संतान पैदा ही नहीं होती और यदि संतान हो जाए तो उनमें से कुछ अधिक समय तक जीवित नहीं करती है।

– यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक किसी मुकदमों में उलझा रहे या बिना किसी कारण उसे कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटना पड़े तो ये भी पितृ दोष का कारण हो सकता है।

– पितृ दोष होने के कारण कन्या के विवाह में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है या तो कन्या का विवाह जल्दी नहीं होता या फिर मनचाहा वर नहीं मिल पाता।

ये है निवारण के आसान उपाय

– सबसे बेहतर ये है कि श्राद्ध के 16 दिन पीपल पर तांबे के कलश में जल लेकर काले तील मिलाकर पूर्वज या पितर के नाम से चढ़ाएं।

– अगर कोई व्यक्ति गरीब हो और चाहने पर भी धन की कमी से पितरों का श्राद्ध करने में समर्थ न हो पाए तो वह किसी पवित्र नदी के जल में काले तिल डालकर तर्पण करे। इससे भी पितृ दोष में कमी आती है।

– अगर श्राद्ध करने वाले की साधारण आय हो तो वह पितरों के श्राद्ध में केवल एक ब्राह्मण को भोजन कराए या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, शक्कर, सब्जी और दक्षिणा दान करें। इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

इससे भी पितृ खुश

– अगर कोई व्यक्ति ऊपर बताए गए उपायों को करने में भी किसी कारणवश कठिनाई महसूस करे तो वह पितरों को याद कर गाय को चारा खिला दे। इससे भी पितृ खुश हो जाते हैं।

– विद्वान ब्राह्मण को एक मु_ी काले तिल दान करने मात्र से भी पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।

– इतना भी संभव न हो तो सूर्यदेव को हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि मैं श्राद्ध के लिए जरूरी धन और साधन न होने से पितरों का श्राद्ध करने में असमर्थ हूं।
– इसलिए आप मेरे पितरों तक मेरा भावनाओं और प्रेम से भरा प्रणाम पहुंचाएं और उन्हें तृप्त करें। विद्वानों के अनुसार ऐसे करने से पितरों को आशीर्वाद प्राप्त होता है।