समाजवादी पार्टी में नए यूपी अध्यक्ष पर हो रहा विचार, सबसे आगे लौटन राम !

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बीते साल लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सपा के राष्ट्रीय अघ्यक्ष अखिलेश यादव ने 23 अगस्त को पार्टी की सभी जिला और महानगर ईकाइयों को भंग कर दिया था. लेकिन प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को उनके पद पर बनाए रखा गया था.

सपा प्रमुख ने इसके साथ ही सभी फ्रंटल संगठनों और विधानसभा क्षेत्रों की कमेटियों को भी भंग कर दिया था. प्रदेश कार्यकारिणी के भंग किए जाने के बाद से पार्टी ने नई नियुक्तियां नहीं की थीं. सपा नेता अपनी-अपनी निजी क्षमता में काम कर रहे हैं.नरेश उत्तम अभी भी सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर हैं. लेकिन अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर हलचलें तेज हो गईं हैं.

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक साथ आए थे और गठबंधन किया था. राष्ट्रीय लोकदल उनकी तीसरी सहयोगी थी. सपा-बसपा करीब 24 साल बाद एक साथ आए थे.

सपा-बसपा का यह महामिलन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की करिश्माई जोड़ी के सामने कोई कमाल नहीं कर पाया था. दोनों दलों के खाते में 15 सीटें आई थीं. इनमें से 10 सीटें बसपा तो पांच सीटें सपा के हिस्से में आई थीं.

सपा के लिए बसपा का यह गठनबंधन न तो फायदे वाला रहा और न ही नुकसान वाला, क्योंकि 2014 के आम चुनाव में भी उसे 5 सीटें ही मिली थीं. लेकिन इस गठबंधन का सबसे अधिक फायदा बसपा को मिला. बसपा को 2014 के चुनाव में शून्य सीटें मिली थीं.

लोकसभा चुनाव के बाद से बसपा ने सपा से रिश्ता तोड़ लिया था. उसने अब सभी चुनाव अकेले ही लड़ने की घोषणा की थी.इसके बाद से ही सपा के प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की आहट सुनाई देने लगी. पहले बदायूं के पूर्व सांसद और अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव के नाम पर चर्चा चली. संसद से लेकर सड़क तक उनकी सक्रियता को देखते हुए युवाओं में उनकी काफी मांग थी. लेकिन परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके नाम को मंजूरी नहीं दी.

अब सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में लौटन राम निषाद का नाम आगे बताया जा रहा है. वो सपा संस्थापक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पुराने साथी हैं. वो सपा की स्थापना के बाद से ही पार्टी से लगातार जुड़े हुए हैं. निषाद को लो प्रोफाइल लेकिन जुझारू नेता माना जाता है.

लौटन राम निषाद मल्लाह जाति से हैं. निषाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की एक प्रभावशाली पिछड़ी जाती है. माना जाता है कि इस जाति का पूर्वांचल की 10 से अधिक लोकसभा सीटों पर प्रभाव है.

नरेश उत्तम के रूप में सपा ने कुर्मियों में पैठ बनाने की कोशिश की थी. लेकिन बीजेपी ने भी अब कुर्मी जाति से आने वाले स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. ऐसे में सपा अगर निषाद को प्रदेश अध्यक्ष बनाती है तो इसे बदलाव और गैर यादव पिछड़ी जातियों में पैठ बनाने की कोशिश के रूप में देखा जाएगा.