उत्तर प्रदेशराजनीति

क्या इस सीट से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी डिंपल यादव !

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आगामी लोक सभा चुनाव के पहले सियासी माहौल गरमा गया है. सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है. हाल में ही सपा-बासप गठबंधन के बाद यूपी में भाजपा के लिए एक बड़ी परेशानियो का दौर शुरू हो गया है. इस बीच कांग्रेस ने भी अकेले यूपी में 80 सीटो पर  चुनाव का ऐलान  कर दिया है. इसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं का मिलना-जुलना जारी है. महागठबंधन की एकता को बढ़ाने के लिए पिछले कुछ दिनों में कई तरह के समीकरण सामने आए हैं.  उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से बसपा-सपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि 2 सीटें अन्य पार्टी के लिए छोड़ी गई है. वहीं, अमेठी-रायबरेली सीट को कांग्रेस के लिए छोड़ा गया है.

अब बताते चले अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व उनकी पत्नी डिंपल यादव चुनाव लड़ सकते हैं। डिंपल कन्नौज से चुनाव लड़ सकती हैं जबकि अखिलेश के लिए नई सीट खोजी जा रही है। हालांकि उन्हें बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में कई सीटों से चुनाव लड़ने का ऑफर है।

विधानसभा चुनाव हारने के बाद अखिलेश ने कहा था कि अगला चुनाव डिंपल नहीं लड़ेंगी। अखिलेश यादव ने कहा था कि नेताजी मुलायम सिंह यादव लोकसभा का चुनाव मैनपुरी से लड़ेंगे।

उन्होंने कहा था कि मैं तो कन्नौज से चुनाव लड़ना चाहता हूं, लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि डिंपल यादव कन्नौज सीट से ही चुनाव लड़ सकती हैं। वहीं अखिलेश यादव के लिए कोई दूसरी सीट की तलाश की जा रही है। गौरतलब है कि डिंपल यादव अभी भी कन्नौज से ही सांसद हैं। डिंपल 2012 से कन्नौज की सांसद चुनी जा रही हैं।

जयंत ने अल्लामा इकबाल का शेर ट्वीट कर दिया बुलंद हौसले का संदेश
राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद बुधवार रात मशहूर शायर अल्लामा इकबाल के एक शेर के जरिये गठबंधन को लेकर बुलंद हौसले का संदेश दिया।

अखिलेश ने जयंत के लिए भेजी अपनी गाड़ी

जयंत ने अखिलेश के साथ मुलाकात के फोटो के साथ ट्वीट किया,- उकाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में, नजर आती है उनको अपनी मंजिल आसमानों में। इस शेर का मतलब भी यही है जब तेज-तर्रार नौजवानों की रुह बुलंद होती है तो उन्हें अपनी मंजिलें आसमानों में नजर आने लगती है।

अखिलेश यादव ने जयंत के साथ मुलाकात में पूरा शिष्टाचार निभाया। उन्होंने जयंत को लाने और भेजने के लिए एयरपोर्ट पर अपनी निजी गाड़ी भेजी। दरअसल, अखिलेश और जयंत की यह मुलाकात दिल्ली में होनी थी, लेकिन कार्यक्रम टलने पर उन्हें लखनऊ आने के लिए कहा गया था।

इसकी भनक पार्टी नेताओं को भी नहीं लगी। वे सीधे सपा दफ्तर आए और वहीं चले गए। वहीं पर रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे समेत कुछ अन्य लोगों को बुलाया गया।

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