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किसी मां का संगीत और पिता की रौनक कैसे छीन सकता है कोई, मैं जानना चाहता हूं..!

किसी भी घर से बिना कुछ बोले बच्चों का एकदम खामोशी से कहीं चले जाना अच्छा नहीं लगता. मैं जानना चाहता हूं..! बुखार के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे बच्चे आखिर घर कब लौटेंगे?

मैं सोते हुए बच्चों को बार-बार देखता हूं. सुनता हूं उनकी सांसों की आवाज़.
मुझे बिल्कुल पसंद नहीं बच्चों की खामोशी
शोर से भरे कमरे खाली हो जाने पर मरघट लगते हैं.

किलकारियों, सिसकियों और रोने की आवाज़ एक मां के लिए संगीत है.
और पिता के लिए रौनक
होगा आपके लिए भले ही एक शोर..!

एक खबर या घटना नहीं है कहीं किसी जगह के बच्चों का बुखार से मर जाना.

ये राष्ट्रीय शर्म का विषय है.

किसी मां का संगीत
और पिता की रौनक कैसे छीन सकता है कोई..!

#बिहार

ये लेख पत्रकार सारंग उपाध्याय के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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