उत्तर प्रदेश

ताबड़तोड़ एनकाउंटर और तड़ातड़ ऑपरेशन, फिर भी बदमाशों में नहीं है यूपी पुलिस का ख़ौफ़, क्यों ?

योगी सरकार बेशक प्रदेश में पुलिस के एनकाउंटरों की फेहरिस्त दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन ये सच है कि तमाम एनकाउंटरों के बाद भी बदमाश संगीन वारदातों को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे हैं। बदमाशों की बेख़ौफी का आलम ये है कि वे खाकी पर भी हमलावर हो रहे हैं। पिछले एक महीने में कई ऐसे वाकये सामने आए जब बदमाश प्रदेश की तेरतर्रार पुलिस पर हावी पड़े। बता दें कि पिछले दिनों मुजफ्फरनगर में पुलिस कस्टडी से एक बंदी को छुड़ाने आए बदमाशों ने दरोगा की गोली मारकर हत्या कर दी थी तो वही संभल में तीन बदमाश दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार हो गए थे। हालांकि बाद में पुलिस ने भी इन तीनों में से एक कुख्यात को मुठभेड़ में मार गिराया था लेकिन दो बदमाश अभी भी फरार हैं। अभी 2 दिन पहले भी बेख़ौफ बदमाशों ने प्रतापगढ़ में चेकिंग के लिए रोकने पर डायल 100 पर तैनात सिपाही को गोली मार कर ज़ख़्मी कर दिया था। जिस की हालत गंभीर बताई जा रही है। 
 

क्यों नहीं है बदमाशों में पुलिस का ख़ौफ

गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर में दरोगा को गोली मारकर बंदी को छुड़ाने वाले गैंग को पुलिस ने पूरी तरह से नेस्तनाबूत कर दिया था । पुलिस ने मुठभेड़ में चार बदमाश मार गिराए थे। वहीं संभल में दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार हुए तीन बदमाशों में से एक को अमरोहा एसपी बिपिन ताड़ा के नेतृत्व में मुठभेड़ में मार गिराया गया। एनकाउंटरों में लगातार ढेर हो रहे बदमाशों के बाद भी सवाल उठता है कि आखिर बदमाशों में पुलिस का ख़ौफ क्यों नहीं है क्यों हर दिन बदमाश पुलिस को चुनौती देते हुए  उत्तर प्रदेश की सड़कों पर खुलेआम अपराध को अंजाम दे रहे हैं 
 
प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली से सटा गौतमबुद्ध नगर ताबतड़तोड़ हो रही आपराधिक वारदातों से दहला हुआ है। जहां एक तरफ लखनऊ में ताबड़तोड़ हत्या के मामले सामने आ रहे हैं तो वही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लूट और हत्या की घटनाओं ने सन्न कर रखा है। वहीं एनकाउंटर वाली पुलिस अपराधियों की लगाम कसने में नाकाम साबित हो रही है। बता दें कि गौतमबुद्धनगर मे ही कुछ दिनों पहले हुई 10 लाख की लूट का पुलिस अब तक ख़ुलासा नहीं कर पाई है। जबकि गौतमबुद्ध नगर में पुलिस 3 दिन में 6 मुठभेड़ का दावा कर रही है । ऐसे में फिर सवाल उठता है कि आखिर पुलिस बदमाशों पर शिकंजा क्यों नहीं कस पा रही है या फिर बदमाशों को एनकाउंटर का ख़ौफ नहीं है
इस तरह के मामले सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस मुखिया विक्रम सिंह कहते हैं कि बेशक योगी सरकार आने के बाद प्रदेश में ईको सिस्टम में एक बहुत सकारात्मक परिवर्तन आया और पुलिस नेतृत्व में अपराधियों के ऊपर कार्रवाई शुरू की गई, एनकाउंटर्स भी हुए लेकिन जो वांछित परिणाम की अपेक्षा थी वो नहीं हो पाए। अब दुर्भाग्य से कुलदीप सिंह सेंगर का प्रकरण सामने आया, संभल में पुलिस अभिरक्षा से सिपाहियों की हत्या कर अपराधियों के पलायन करने का मामला सामने आया और पुलिसकर्मी द्वारा एक सहकर्मी की बेटी के साथ दुराचार, इन सब मामलों के साथ ही थानों में टिकटॉक, अनाप शनाप नाच-गाने की बेहूदगी के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन सबके लिए सीधे तौर पर  दोषी पुलिस नेतृत्व है। डीजीपी ओपी सिंह के कुशल नेतृत्व में भी अगर ये कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो अचंभे की बात है।
पूर्व डीजीपी कहते कि उन्हे जानकारी मिली है कि पुलिस लाइन में ओआर, ड्रिल, परेड व अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई वर्षों से नही हुई है। इसी का दुष्परिणाम आज यूपी पुलिस महकमा भोग रहा है। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह आगे कहते हैं वे उम्मीद करते हैं कि पुलिस नेतृत्व परिपक्व मार्गदर्शन करेगा और सुनिश्चित करेगा कि एनकाउंटर हो लेकिन सही और ऐसे अपराधियों का जिसका प्रभाव अंडरवर्ल्ड में माफियाओं के ऊपर हो। केचुएं, नेवले के एनकाउंटर का फायदा क्या और टाइगर सशक्त घूमे और भय व आतंक व्याप्त कराएं। इसलिए जरूरी है कि एनकाउंटर करें,अच्छी परंपरा है लेकिन सही एनकाउंटर करें और ऐसे शातिर अपराधियों का करें जिनका प्रभाव जनता में सुरक्षा की भावना हो। 
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