जिन हाथों में होनी चाहिए किताबें, उन हाथों से जलती है लाशें और कहता है…

आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुना रहे हैं जिसको सुनने के बाद आपकी रूह कांप जाएगी. और आप भावुक भी हो जाएंगे. अक्सर आम इंसान डेड बॉडी के सामने खड़े होने से घबराता है, मगर ये बच्चा बॉडी राख ना बन जाए वहां से हिलता नहीं. इतना ही नहीं, उसका रोज का काम खत्म करके घर जाकर मां के लिए खाना भी बनाता है. भगवान भी ऐसा खेल खेलता है इसी समाज में बच्‍चे लग्‍जिरियस लाइफ जीते हैं और इसी समाज में दूसरी तरफ एक बच्‍चा गरीबी की मार झेलता है.

जिन हाथों में किताबें होनी थी, उन्हीं हाथों से लाशें जलाता है

ऐसे ही दुख की कहानी 11 साल के बच्चे की है. जिसे बीमार मां को बचाने के लिए मजबूरन नाबालिग उम्र में काम करना पड़ रहा है. किताबों और दोस्तों के साथ खेलने की उम्र में 11 साल के बच्चा लाशों के बीच गुजर रहा है. वे फिलहाल श्मशान घाट में काम करता. जिससे उसकी मां की दवाइयों का पैसा और खाने का खर्चा निकल जाए.

आपको बता दे कि उसके पिता की मौत जब वो छोटा था तब हो गई थी और उसी समय से मां की तबियत भी खराब रहती है. मां काफी समय से बिस्तर से जकड़़ी है. वे ऐसी हालत में कोई काम नहीं कर पाती. बीमारी से वे खुद श्मशान में काम करती थी, जिसके बाद बेटे ने पैसे कमाने के लिए वहीं काम करना शुरू कर दिया. जिससे ववो अपनी बीमार मां को बचा सकें. अब ये कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

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