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यूपी में अब कांग्रेस का नया दांव, पार्टी अब तलाशेगी “अपना कौन “

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मेरठ :  2019 लोक सभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने तेजी पकड़ ली है इस बीच खबर ये भी आ रही है की तीन दशक से सत्ता से बेदखल कांग्रेस पार्टी जनाधार बढ़ाने के लिए यूपी में ‘अपना कौन’ को तलाशेगी। इसमें लिए पार्टी की टीम प्रतिष्ठित सामाजिक, व्यापारिक संगठनों के साथ एनजीओ और सियासी राय रखने वाले प्रमुख लोगों से संपर्क करेगी। हर बूथ पर आठ जोशीले युवा इस काम को अंजाम देने में जुटेंगे।
कांग्रेस, देश के सबसे बड़े सूबे और दिल्ली का मुहाना कहे जाने वाले यूपी में सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है। करीब तीन दशक से वह सत्ता से बाहर है। क्षेत्रीय दलों के प्रभाव के बाद कमजोर कांग्रेस अब बीजेपी के सामने मजबूती दिखाना चाहती है। ऐसा 2019 के चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने का उसका प्लान है। बीएसपी प्रमुख मायावती के कड़े रुख और एसपी प्रमुख अखिलेश यादव बदले तेवर के बाद कांग्रेस खुद की कितना जनाधार परखने में जुट गई है।

कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने हर बूथ पर एक अध्यक्ष और आठ दूसरे जोशीले युवा जोड़े जा रहे हैं। इन युवाओं का काम वोटर आईडी बनवाने से लेकर वोट डलवाने तक का रहेगा। इसके साथ ही यह भी जानकारी जुटाएंगे कि कांग्रेस के समर्थन में कौन हैं। इसके लिए वह सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संगठनों, एनजीओ, सियासी राय जताने वाले बुद्धिजीवियों, रिटायर्ड शिक्षक, डाक्टर, इंजिनियरों, समाज के काम में जुटी महिलाओं और महिला संगठनों से मिलेंगे। जानकारी हासिल करने के बाद पार्टी के बारे में सॉफ्ट कार्नर रखने वाले इन समूह के पास सीनियर नेता या कमिटी के लोग जाकर जोड़ना का काम करेंगे। पार्टी का मानना है कि संगठनों से संपर्क होने से एक साथ काफी लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती हैं। ये जोशीले युवा अपने साथ कम से कम 20 नए युवाओं को जोड़कर अपनों को पहचानने में सहयोग करेंगे।

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बीजेपी के वादे और वादाखिलाफी का चिट्ठा करेंगे पेश 
कांग्रेस मोदी सरकार के वादे और वादाखिलाफी की असलियत सामने रखने लिए लोगों से फेस-टु-फेस बात करेगी। इसके लिए युवक कांग्रेस को जिम्मा सौंपा गया है। युवक कांग्रेस के ब्लाक स्तर तक का संगठन फर्स्ट टाइम वोटर्स को अपने पक्ष में लामबंद करने का काम करेगी। इसके लिए चौपाल पर फेस-टु-फेस बात यानी संवाद करेंगे। अभियान को नंवबर के अंत में तेजी से शुरू किया जाएगा।

इस युवा टीम का काम होगा कि बीजेपी की तरफ से चुनाव के वक्त क्या क्या वादे किए किनको पूरा नहीं कर वादाखिलाफी की, उनको बताए। इसी के साथ कांग्रेस की सरकार आने पर राहुल गांधी की तरफ से युवाओं से सुनहरे फ्यूचर के प्लान बताएंगे। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री मुकेश चौधरी का कहना है कि कांग्रेस में संगठन में जल्द और मजबूती दिखाई देगी। झूठी बीजेपी के खफा और हताश लोगों की नजर कांग्रेस की तरफ हैं।

गठबंधन और अकेला चलों पर कांग्रेसियों की राय जुदा 
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक लगातार बीएसपी और एसपी के बदलते रुख से कांग्रेस में गंठबधन या अकेला चलों को लेकर राय जुदा है। बताते हैं कि कुछ जिलों से बिना गठबंधन जबकि कुछ जगह से अकेला लड़ने की राय आ रही हैं। अकेला लड़ने के समर्थकों का तर्क है कि 2009 में कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़ी थी, तब पार्टी ने 19.25 प्रतिशत वोट हासिल कर 21 सांसद जिता लिए। जबकि सूबे में सरकार चला रही बीएसपी के 27 फीसदी मत लेकर भी 20 एमपी जीते थे। एसपी के 23 सांसद बने थे, जबकि 2014 में लोकसभा चुनाव आरएलडी और 2017 का विधानसभा चुनाव एसपी के साथ पार्टी लड़ी। दोनों चुनाव में उम्मीद के मुताबिक रिजल्ट नहीं आया। इसलिए 2019 का चुनाव अकेले लड़ा जाए। गठबंधन करने भी पड़े तब उसका आधार 2009 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को रखा जाए, जिससे ज्यादा सीट पार्टी को मिले।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर मोहम्मद युसुफ का कहना है कि कांग्रेस देश हित की सोच रखती हैं। बड़ा दिल रखती है। गठबंधन करने की सोच सिर्फ जनविरोधी बीजेपी को हटाने की हैं। वर्ना कांग्रेस संगठन की गठबंधन के साथ भी और अकेले भी चुनाव की पूरी तैयारी है।

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