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यूपी में उम्मीदवारों के ऐलान में कांग्रेस की तेजी, क्या इसके पीछे है पार्टी का प्लान-B?

लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के नामों पर देश के तमाम दल विचार कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के चयन में तेज़ी से काम कर रही है. कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की दूसरी सूची भी जारी कर दी है. इस सूची में 21 प्रत्याशियों के नाम हैं, जिनमें 16 नाम उत्तर प्रदेश के हैं, तो 5 नाम महाराष्ट्र के हैं.

यूपी में कांग्रेस की डगर चुनौतियों से भरी है. यूपी में कांग्रेस की बागडोर प्रियंका गांधी के हाथों में है, फिर भी यहां गठबंधन और बीजेपी से मुक़ाबला करके अपने आधार को मज़बूत करना कांग्रेस के लिए आसान नहीं दिखता.

वैसे तो सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले के जरिए कांग्रेस को सवर्ण वोट बैंक से आस है, लेकिन अभी तक जिन नामों का ऐलान हुआ है उनमें सोनिया और राहुल गांधी को छोड़कर सिर्फ 3 ब्राह्मण प्रत्याशी ही मैदान में उतारे गए हैं, जिससे सवर्ण वोट बैंक में पुराना विश्वास जगाना किसी मुश्किल के कम नहीं होगा.

खास बात ये है कि एक तरफ सपा-बसपा का गठबंधन बीजेपी की हिंदुत्व वाली छवि से मुक़ाबला करने के लिए मुस्लिम प्रत्याशियों पर दांव लगाने से परहेज़ कर रहा है, तो दूसरी ओर कांग्रेस मुस्लिमों को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश कर रही है. कांग्रेस ने 7 मुस्लिम प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, इनमें इमरान मसूद, सलमान ख़ुर्शीद, सलीम शेरवानी, ज़फ़र अली, केशर जहां, मंज़र राही और परवेज़ ख़ान के नाम हैं.

हालांकि गठबंधन के पास क़रीब 40 फ़ीसदी वोट बैंक है, इसलिए मुस्लिम वोट कांग्रेस के खेमे में जाने पर संशय है, लेकिन मुस्लिम प्रत्याशी इस वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं.

यूपी में कांग्रेस का प्लान बी:

शिवपाल यादव की पार्टी से गठबंधन की संभावना को देखते हुए राज बब्बर को कांग्रेस ने फिरोज़ाबाद सीट की बजाय मुरादाबाद सीट से उम्मीदवार बनाया है, मुस्लिम बहुल मुरादाबाद सीट 2009 में कांग्रेस के पास थी. अब भले ही राज बब्बर के लिए ये सीट नई हो, लेकिन अज़हरुद्दीन इसे कांग्रेस की झोली में ला चुके हैं, इसलिए कांग्रेस उम्मीद के सहारे इस सीट पर एक्सपेरिमेंट कर रही है.

इसके अलावा समाजवादी पार्टी और बीजेपी के असंतुष्ट नेताओं को भी टिकट देकर कांग्रेस ने दूसरी पार्टी के असंतुष्टों के लिए दरवाज़े खोल दिए हैं. बात फतेहपुर सीट की हो तो यहां पर राकेश सचान का आधार मज़बूत है, लेकिन यहां एसपी से अलग होकर कांग्रेस की जड़ें जमाने में उन्हें मुश्किल आ सकती है.

वहीं दलित बहुल बहराइच सीट से सावित्री बाई फुले को टिकट देने का फ़ैसला कांग्रेस का रणनीतिक कदम है, इससे आसपास की सीटों पर भी दलित वोटबैंक पर असर पड़ेगा.

 

 

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