राहुल का इस्तीफा हर हाल में चाहती थीं प्रियंका, जानिए इसके पीछे की वजह !

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लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। इसमें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की, जिसे पार्टी नेताओं ने सर्वसम्मति से नामंजूर कर दिया। इसके अलावा कार्यसमिति ने राहुल गांधी को पार्टी में विस्तृत पुन: संरचना के लिए भी अधिकृत किया है। सूत्रों ने बताया कि इसके बावजूद राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े रहे। बताते चले कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में भले ही राहुल गांधी का इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया हो लेकिन सूत्रों की मानें तो उनकी बहन प्रियंका गांधी इसके समर्थन में नजर आ रही हैं। सूत्रों के मिली जानकरी के अनुसार, प्रियंका ने कहा, ‘मैं अपने भाई के फैसले के पीछे की वजह जानती हूं।

बताते चले प्रियंका चाहती थीं कि ये पद किसी अन्य व्यक्ति को पार्टी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाए। इससे पहले हार के कारणों का मंथन करने के लिए कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक दिल्ली मुख्यालय में शनिवार को बुलाई गई थी। बैठक में 48 वर्षीय पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद वह इस्तीफा देना चाहते हैं। शनिवार को कांग्रेस की CWC में राहुल ने कहा था कि पार्टी के खराब प्रदर्शन के चलते वह पद से इस्तीफा देना चाहते हैं। . प्रियंका का मानना है कि राहुल पार्टी नेतृत्व को एक विकल्प खोजने का वक्त दें।

राहुल ने बैठक में कहा, ‘हमें अपनी लड़ाई को जारी रखना होगा. मैं कांग्रेस का अनुशासित सिपाही हूं और रहूंगा और बिना डरे लड़ता रहूंगा लेकिन मैं अब पार्टी का अध्यक्ष बनकर नहीं रहना चाहता।’ 4 घंटे तक चली इस बैठक में जब किसी अन्य का नाम पार्टी अध्यक्ष के रूप में उठा तो राहुल ने कहा, ‘मेरी बहन को इस सब में मत लाइए। यह जरूरी नहीं है कि पार्टी अध्यक्ष गांधी परिवार से ही होना चाहिए।’ इससे पहले मीडिया ने खबर दी थी कि प्रियंका ने राहुल गांधी को पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से मना किया था। खबर के अनुसार प्रियंका का कहना था कि राहुल गांधी को अपने पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए। कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘भाजपा चाहती है कि राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद इस्तीफा दे दें। अगर वह ऐसा कदम उठाते हैं तो वह खुद-ब-खुद भाजपा के जाल में फंस जाएंगे।’ इससे पहले पी. चिदंबरम के अलावा एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद ने भी राहुल गांधी को इस्तीफा देने का विरोध किया था।

कार्यसमिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति व एक स्वर से इसे खारिज करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष का आह्वान किया कि प्रतिकूल व चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पार्टी को राहुल गांधी के नेतृत्व व मार्गदर्शन की आवश्यकता है।  कांग्रेस कार्यसमिति ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश के युवाओं, किसानों, महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ों, गरीबों, शोषितों व वंचितों की समस्याओं के लिए आगे बढ़कर जूझने का आग्रह किया।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि चुनावों के बाद यह पार्टी की पहली बैठक थी, जिसमें आमतौर पर विस्तृत चर्चा नहीं होती है। समिति ने इस बैठक में जनता और कार्यकर्ताओं से मिले समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जीत एवं हार अलग विषय है लेकिन राहुल गांधी ने पार्टी को एक नेतृत्व प्रदान किया है। यह पार्टी के अंदर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी के अंदर और देश की परिस्थितियों की विस्तृत समझ है, जिसे देखते हुए राहुल गांधी को अध्यक्ष पद पर बने रहने का आग्रह किया। कार्यसमिति की बैठक में स्पष्ट कहा गया है कि देश में अगर कोई विपक्ष के नेता की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभा सकता है तो वह राहुल गांधी हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने कहा कि इस बैठक में सीमित समय में संक्षिप्त चर्चा हुई है। आगे हार के कारणों पर व्यापक चर्चा होगी और आवश्यकतानुसार बदलाव किए जायेंगे। एंटनी 2014 में भी कांग्रेस की हार के कारणों की समीक्षा करने वाली समिति के अध्यक्ष थे, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपी थी। उन्होंने आज प्रेसवार्ता में कहा कि उस समय सौंपी गई रिपोर्टों में से कई विषय लागू किए गए थे।