कांग्रेस ने कर दिया है साफ, उंगलियों पर नचाकर ही बनने और चलने देंगे शिवसेना सरकार

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जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है महाराष्ट्र की राजनीति में अनिश्चितता भी बढ़ती जा रही है. भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत न होने की वजह से सरकार बनाने में असफल है. शिवसेना से प्रीपोल गठबंधन होने के बावजूद भाजपा और शिवसेना के बीच सबकुछ ठीक नहीं दिखाई दे रहा है. अब इस परिदृश्य में एक नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है. कांग्रेस की तरफ से शिवसेना को समर्थन की बाते तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही शुरू हो गयी थी, लेकिन अब आधिकारिक बयान भी आने लगें हैं. कांग्रेस अब यह चाहती है कि शिवसेना खुले तौर पर भाजपा से अपना गठबंधन तोड़ने का ऐलान करे तथा कांग्रेस से समर्थन की मांग करे.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने कहा है कि, “उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी का गठबंधन से बाहर निकलने पर ही शिवसेना को समर्थन का कोई भी निर्णय निर्भर लिया जायेगा.” इसके अलावा ने सोनिया गाँधी को चिट्ठी लिखकर शिवसेना को समर्थन देने की माँग की है. पत्र में ने कहा है कि कांग्रेस को सरकार बनाने में शिवसेना का समर्थन करना चाहिए. दलवई का कहना है कि कांग्रेस के उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति बनाने में शिवसेना ने कांग्रेस का समर्थन किया था. ऐसे में अब महाराष्‍ट्र में कांग्रेस को भी शिवसेना का समर्थन करना चाहिए.

इस सबसे ये साफ है कि कांग्रेस एक बार फिर अपनी कर्नाटक वाली राजनीति करने पर उतर आई है. किसी भी प्रकार से शिवसेना के नेता को यह पार्टी लालच देकर JDS के कुमारास्वामी की तरह मुख्यमंत्री पद पर बैठा देगी, लेकिन इसके बाद क्या होगा वह किसी से छिपा नहीं है. अगर शिवसेना कांग्रेस के साथ जा मिलती है तो उस परिस्थिति में शिवसेना (56), कांग्रेस (44) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (54) मिल कर 154 सीट के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लेंगे.

अगर ऐसा संयोग हो जाता है तो एक बार फिर से हमें कर्नाटक का राजनीतिक नाटक महाराष्ट्र में भी देखने को मिल सकता है. यदि कांग्रेस शिवसेना की शर्त मानकर उसके साथ गठबंधन कर सत्ता में आती है तो वो किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय और योजनाओं में हावी होने की पूरी कोशिश करेगी जैसा कि कर्नाटक में कुमारस्वामी की सरकार में देखने को भी मिला था. मतलब यह कि अगर सीएम पद पर आदित्य ठाकरे बैठ भी जाते हैं, तो वो कर्नाटक के कुमारस्वामी की भांति ही कांग्रेस की कठपुतली बनकर रह जायेंगे.

आपको याद होगा कि किस तरह कांग्रेस ने जेडीएस के कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बना कर कई महीनों तक दबाव में रखा. कई बार तो खुद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कांग्रेस के दबाव से परेशान दिखे और कई मौकों पर वो रोते भी नजर आये. कभी ‘कांग्रेस मेरी नहीं सुनती’ का रोना तो कभी ‘मैं मजबूर हूं का रोना‘, कभी किसानों के सामने रोना, मीडिया के समक्ष रोना. अब अगर कल को कांग्रेस शिवसेना की गठबंधन सरकार बनती है और कल को आदित्य ठाकरे भी आपको रोते हुए दिखाई दें तो इससे किसी को हैरानी नहीं होगी.