ये हैं सीएम योगी के ‘चित्रगुप्‍त’, गोरखनाथ मंदिर वाले ‘डंडा बाबा’

गोरखनाथ मंदिर में एक ऐसे संत हैं जो माथे पर तिलक, गले में रुद्राक्ष की माला, सिर पर भगवा साफा और भगवा वस्‍त्र होने के साथ ही, उनके हाथ में भगवा कलम ही उनकी पहचान बन चुकी है. तनाव तो जैसे उनसे कोसों दूर रहता है. बगैर किसी झुंझलाहट के वह लोगों की बात सुनते हैं, और प्रार्थना पत्र लिखकर उनकी मदद करते हैं. ये कोई और नहीं सीएम योगी के ‘चित्रगुप्त’ कहे जाते हैं. इनका नाम है ‘डंडा बाबा’.

फरियादियों के मददगार बनें हैं योगी के चित्रगुप्‍त

योगी आदित्‍यनाथ द्वारा सूबे की कमान संभालने के बाद से यहां पर भीड़ काफी बढ़ गई है. ऐसे में डंडा बाबा डंडा बाबा बीच-बीच में उठकर जनता दरबार के बाहर भी जाते हैं और बाहर बैठे पीडि़तों से पूछते हैं कि कोई ऐसे भी फरियादी तो नहीं है जिसे कोई परेशानी है.इसमें अधिकतर फरियादी गांव के हैं, और पढ़े-लिखे भी नहीं हैं. इन फरियादियों के मददगार बनें हैं योगी के चित्रगुप्‍त. जो मंदिर में आने वाले पीडि़तों का प्रार्थनापत्र लिख उनकी मदद कर रहे हैं.ऐसे में उन्‍हें हर रोज 200 से 250 प्रार्थनापत्र लिखना पड़ रहा है. वह लोगों की निःस्‍वार्थ भाव से मदद कर रहे हैं.

‘डंडा बाबा’ कैसे मिला नाम

दरअसल गोरखनाथ मंदिर परिसर में एक जमाने से ध्रुव प्रताप सिंह अपनी सेवा दे रहे हैं. इन्‍हें मंदिर में आने वाले फरियादी ‘डंडा बाबा’ के नाम से जानते हैं. डंडा बाबा सभी फरियादियों की मदद के लिए उपस्थित रहते हैं. साक्षर और निरक्षर दोनों तरह के फरियादी जो अपना प्रार्थना पत्र नहीं लिख पाते हैं, वह डंडा बाबा की मदद लेते हैं. एक फरियादी सुशील बताते हैं कि वह यहां पर आए थे, डंडा बाबा ने प्रार्थनापत्र लिखकर उनकी मदद की है. उन्‍हें उम्‍मीद है कि हर बार की तरह इस बार भी उन्‍हें यहां से न्‍याय मिलेगा.

डंडा बाबा ऐसे लोगों की मदद करने में जरा भी संकोच नहीं करते हैं. जब मंदिर में कम फरियादी आते थे तब भी वह लोगों के प्रार्थना पत्र लिखते रहे हैं, और मंदिर में भीड़ बढ़ने के बाद भी वह निरंतर पत्र लिखते रहते हैं.उसके बाद प्रार्थनापत्र के साथ योगी आदित्‍यनाथ के लेटर पैड पर आवश्‍यक निर्देश लिखकर उसे प्रार्थनापत्र के साथ संलग्‍न कर दिया जाता है.