राजस्थान में सूर्यग्रहण देखने से बच्चों की आंखें हुई खराब, रेडिएशन से जल गया रेटिना

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यदि आप सूर्यग्रहण को सीधे (बिना किसी चश्मे या अन्य जरूरी सावधानियों के) देख रहे हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि बिना सुरक्षा सूर्यग्रहण देखने से दर्जनों बच्चों, युवकों और लोगों की आंखें जीवनभर के लिए धुंधली हो चुकी हैं। डॉक्टर्स की मानें तो इन बच्चों की आंखें अब फिर कभी पूरी तरह सही नहीं हाे सकती। एसएमएस के नेत्र विभाग में पिछले कुछ दिनों में 15 से अधिक ऐसे बच्चे सामने अा चुके हैं, जिनकी कोई ना कोई आंख 40 से 70 फीसदी तक खराब हो चुकी हैं।

26 दिसम्बर को हुए सूर्यग्रहण पर शहर में कई युवाओं और बच्चों ने बिना किसी आंखों की सुरक्षा के लिए सूर्य देखा। कुछ दिन बाद उन्हें धुंधला दिखाई देने लगा। परेशान परिजन असपताल पहुंचे तो चौंकाने वाली बात सामने आई और सामने आया कि सूर्यग्रहण देखने की वजह से ऐसा हुआ है। इस बारे में नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष कमलेश खइल्लानी का कहना है कि सूर्यग्रहण की वजह से कई बच्चों और युवाओं की अांखें खराब हुई हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंेकि इन्होंने बिना किसी सावधानी के सूर्यग्रहण देखा। ऐसे मामलों में बहुत ही सावधानी रखने की जरूरत है।

आखिरकार ऐसा क्यों हुआ

जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य की चमकती सतह चंद्रमा के कारण दिखाई नहीं देती और चंद्रमा की वजह से जब सूर्य छिपने लगता है तो इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहते हैं। डॉक्टर्स ने बताया कि आमतौर पर तेज रोशनी के चलते सूर्य को खुली आंखों से हम दो से पांच सैंकड तक ही देख सकते हैं। .इस दौरान आंखों की पुतली सिर्फ 2 एमएम तक ही खुलती है, लेकिन सूर्यग्रहण के दौरान जब सूरज की रोशनी कम हो जाती है तो हम खुली आंखों से दो से तीन मिनट तक उसे देख लेते है। लोगों को यह पता नहीं होता कि इस दौरान भले ही रोशनी कम होती है, लेकिन रेडियेशन का प्रभाव अधिक रहता है। यहां तक कि सूरज की रोशनी कम होने से आंखों की पुतली भी 5 से 6 एमएम तक खुलती है। ऐसे में अधिक देर तक सूरज को देखते रहने पर रेडिएशन सीधे रेटिना को डेमेज कर देती है।