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दो-दो हजार में बच्चे गिरवी रख दिए 500 परिवार, राजस्थान में क्यों हो रहा ऐसा ?

हर इन्सान के लिए उनका परिवार और उसके बच्चे सबसे अधिक प्रिय होते है. ऐसे में कोई अपने मासूम बच्चो को किसी और के पास कैसे गिरवी रख सकता है। वो भी सिर्फ डेढ़ से दो हजार रुपए के लिए। जी हाँ ! यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि राजस्थान के बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिले की सीमा से सटे आदिवासी बाहुल्य गांवों की सबसे कड़वी और खौफनाक हकीकत है और आज हम आपको अपने पोस्ट के माध्यम से बताने जा रहे है।

ऐसा क्यों हो रहा है

यहाँ तो बताते चले राजस्थान में पेयजल संकट के साथ ही अब भूख संकट भी मंडराने लगा है। राजस्थान के बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिले में तो नौबत यहां तक पहुंच गई है कि यहां के करीब 500 परिवारों को इस भूख संकट से बचने के लिए अपने मासूम बच्चो को गिरवी तक रखना पड़ रहा है। इस सम्बन्ध में शिकायतें अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC ) तक पहुंच गई हैं। आयोग ने इन शिकायतों पर चिंता ज़ाहिर की है और इसे गंभीर स्थिति माना है। आयोग ने प्रदेश के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब कर जानकारी भी मांगी है।

इस गंभीर संकट पर NHRC ने राजस्थान के बांसवाड़ा व प्रतापगढ़ जिले में 500 परिवारों के भूख से बचने के लिए अपने बच्चों को गिरवी रखने की शिकायतों पर बेहद चिंता जताते हुए कहा यदि शिकायतें सही हैं तो लगता है इन जिलों में केन्द्रीय योजनाओं को लागू करने में राज्य सरकार विफल रही है। आयोग ने इस मामले में मुख्य सचिव से 6 सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है, वहीं केन्द्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के हालात बताने को भी कहा गया है।

इन जगहों पर​ गिरवी रखे जाते हैं बच्चे
मिली जानकारी के अनुसार इन राजस्थान में आदिवासी परिवारों के आर्थिक हालत बेहद ख़राब है। ऐसे में ये बच्चों के दो वक्त की रोटी की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। इसलिए बच्चों को गड़रियों के पास गिरवी रख देते हैं ताकि बच्चों को रोजगार मिल जाए तो परिवार को आर्थिक मदद। ऐसे मामले बांसवाड़ा जिले के गांव चुंडई, बोरतलाब व मेमखोर और प्रतापगढ़ जिले के गांव भैंठेसला, बावड़ीखेड़ा, कटारों का खेड़ा, लिम्बोदी, अंबाघाटी आदि में सामने आए हैं।

 

जानिए क्या कहते हैं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष

मासूम बच्चों को गिरवी रखने के मामले पर बांसवाड़ा के बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश त्रिवेदी ने बताया कि मासूम बच्चों को गरीबी अशिक्षा अज्ञानता के कारण परिवार वाले मासूम बच्चों को गडरिया के पास में गिरवी रखकर अपना काम निकाल लेते हैं। यह जनजातीय क्षेत्र है। यहां लोगों में समझ नहीं है और बच्च गलत आदतें ग्रहण करते हैं। घर पर रहते हैं। स्कूल नहीं जाते हैं। बिगड़ जाते हैं। यह भी एक दूसरा कारण है जिसके चलते परिजन परेशान होकर गडरिया को सुपर्द कर देते हैं। और उसके बदले जो रुपए मिलते हैं उससे उनके परिवार का गुजारा करते हैं।

पुलिस ने दलाल को पकड़ा

रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों के गिरवी रखने के कुल 14 मामले सामने आए हैं। गिरवी रखे गए कुछ बच्चे किसी तरह गडरियों के चुंगल से भाग निकलने में कामयाब हुए हैं। वहीं मानव तस्करी यूनिट की टीम जब खमेरा थाना क्षेत्र के चुंडई गांव पहुंची तो मासूम बच्चों को गिरवी रखने के कई मामले उसके सामने आए।पुलिस ने इस मामले में चौखलाल नाम के एक दलाल पर शिकंजा कसा है। चौखलाल ने पुलिस पूछताछ के दौरान ये कबूल किया है कि वो बच्चों को गडरियों के पास भेजता है। साथ ही कलेक्टर आशीष गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते गुए दानपुर और घाटोल चेक पोस्ट से गुजरने वाले हर गडरिये और उसके साथ मौजूद बच्चों की पूरी जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं।

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