धर्म

पुत्र प्राप्ति के लिए करे इन चमत्कारी मंत्रो का जाप, लड्डू गोपाल जैसी होगी प्यारी संतान

श्री कृष्ण जन्माष्टमी भाद्र माह में मनाई जाती है। कहते हैं जैसे सावन माह भगवान शंकर को बहुत प्रिय होता है उसी तरह भाद्र माह भी बहुत प्रिय होता है। कृष्ण जन्माष्टमी पूरे देश में मनाई जाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की हिंदू पुराणों के अनुसार भाद्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा के कारागार में श्री कृष्ण का जन्म हुआ। उस दिन से लोग साल के कृष्ण पक्ष को जन्माष्टमी मनाई जाने लगी। आपको बता दें इस दिन स्वयंम भगवान कृष्ण ने पृथ्वी पर अवतारित हुए थे इस लिए जन्माष्टमी का पर्व खास माना जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना की जाती है और उन्हें 56 भोग भी लगाया जाता है। पूरी मथुरा नगरी को सजाया जाता है और भक्ति गीतों के साथ सभी नाचते गाते हैं। इस दिन सभी कृष्ण भक्त जन्माष्टमी का व्रत रखकर अष्ठमी की रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाते हैं। कान्हा जी योगेश्वर के पालनहार श्री कृष्ण का एक अवतार हैं। जन्माष्टमी के दिन सभी श्रद्धालु श्री कृष्ण जन्मभुमि के दर्शन के लिए जाते हैं।

बताते चले  यदि कोई संतान के सुख से वंचित हो तो उसे भगवान विष्णु के 8वें मानवरूपी अवतार श्रीकृष्ण का ध्यान करना चाहिए। लेकिन इसके लिए कृष्ण के बाल रूप यानी नटखट गोपाल की पूजा करनी चाहिए। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि कृष्ण के गोपाल रूप की पूजा करने से कृष्ण जैसी ही प्यारी और सुंदर संतान मिलती है। इस कामना को पूर्ण करने के लिए 21 दिनों की साधना (पूजा) की जाती है। यह साधना स्त्री स्वयं घर पर ही कर सकती है। यदि 21 दिनों तक विधिवत यह साधना कर ली जाए तो संतान का सुख प्राप्त होता है।

संतान प्राप्ति के लिए श्रीकृष्ण की साधना:

भगवान कृष्ण का बाल रूप यानी ‘कान्हा’ अपने माता-पिता का आज्ञाकारी था। इसलिए हर कोई चाहता है कि उसे कृष्ण जैसी संतान प्राप्त हो जो अपने माता-पिता के सुख और रक्षा के लिए दुनिया भर से लड़ जाए। शास्त्रों में 21 दिन की साधना का उल्लेख मिलता है। यदि साधक चाहे तो यह साधना 45 दिन या इससे बढ़कर भी की जा सकती है। यह पूर्णतः श्रद्धा पर निर्भर करता है। मगर कम से कम 21 दिन लगातार कृष्ण के गोपाल रूप की पूजा करना अनिवार्य है।

ऐसे करें साधना

– साधना के लिए साधक सुबह जल्दी उठे। स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें और पूजा के लिए प्रसाद बनाए
– प्रसाद में कृष्ण को प्रिय लड्डू बनाएं। ये लड्डू साधक के ही हाथ से बने होने चाहिए। बाजारी लड्डुओं का इस्तेमाल ना करें
– केवल दो लड्डू बनाएं। यदि पहले दिन दो लड्डुओं का इस्तेमाल हुआ है तो हर दिन इसी संख्या में लड्डू बनाएं
– लड्डू बनाने के बाद कृष्ण के बाल रूप की तस्वीर या मूर्ति के सामने आसन लगाकर बैठ जाएं। हाथ में तुलसी या रुद्राक्ष माला लें और निम्नलिखित में से किसी भी एक मंत्र का तीन माला जाप करें

सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुच।।

देवकीसुतं गोविन्दम् वासुदेव जगत्पते।
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।।

– मंत्र जाप के बाद लड्डू गोपाल को प्रसाद का भोग लगाएं। यह प्रसाद सबसे पहले साधक खुद गरहन करे और फिर परिवार के सदस्यों में इसे बांटे
– लगातार 21 दिनों तक इस साधना को करने से भगवान कृष्ण की कृपा होती है और संतान सुख की प्राप्ति के योग बनते हैं

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