इन राज्यों में पहला पीरियड होने पर किये जाते हैं ये काम, जान कर होगी हैरानी

पीरीयड्स औरतों के शरीर में होने वाली नैचुरल प्रक्रिया है. अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन इसी टॉपिक पर बनी है.कई लोगों को कई तरह की सीख दे रही है वहीँ दूसरी तरफ पीरीयड्स जैसे सेंसिटिव मुद्दे पर कई सेलिब्स के व्यू भी आ रहें हैं,

पुराने समय में सुविधाओं की कमी होने के कारण सैनेटरी नैपकीन जैसी कोई चीज नही थी. औरतों को पांच दिन बिताने में बहुत केपरेशानी होती थी.

देश के कुछ हिस्सों में महिलाओं की इस तकलीफ को समझते हुए उन्हें राहत देने के लिए कुछ रस्में अपनाई गई ताकि उन्हें कुछ आराम मिल सके. इन परंपराओं को आज भी लोग अपना रहे हैं. आइये जानते हैं इन परम्पराओं के बारे में…

कर्नाटक

पीरियड् के दिनों का दर्द औरतेें ही समझ सकती हैं. पहली बार तो इसे सहने में बहुत परेशानी होती है. कर्नाटक में पहले पीरियड के दौरान घर और आस-पास की महिलाएं इकट्ठी होकर खुशी मनाती हैं. लड़की की आरती करती हैं, लड़की को तिल और गुड़ से बना चिगली उंडे नाम की डिश खाने को दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि चिगली उंडे खाने से खून के बहाव में कोई रूकावट नहीं आती. घर आए मेहमानों को फूल,नारियल और पान के पत्ते भी दिए जाते हैं.

तमिलनाडु

यहां पर पहले पीरियड को खुशी की तरह मनाया जाता है. बरसों से निभाई जाने वाली ‘मंजल निरट्टू विज्हा’ (Manjal Neerattu Vizha) नाम की परंपरा का लोग आज भी पालन कर रहे हैं. इस दौरान लड़की को सिल्क की साड़ी पहनाई जाती है और यह रस्म विवाह की तरह मनाई जाती है.

असम

यहां पर ‘तुलोनी बिया’ (Tuloni Biya) नाम की परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान लड़की को पांच दिन अलग कमरे में रखा जाता है, जहां पर पुरूषों को जाने की मनाही होती है. इसके साथ ही दो जोड़ी छाली को लाल कपड़े में बांधकर पड़ोसी रखा जाता है और इस छाली की पूजा पड़ोसी के घर ही की जाती. सात सुहागिन औरतें लड़की को नहलाती हैं, उसे दुल्हन की तरह सजा कर छाली की पूजा की जाती है.