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बुलंदशहर बवाल : अब तक हुई 4 की गिरफ्तारी, बेटे ने बोली ये बड़ी बात….

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Bulandshahr Violence

यूपी  में बुलंदशहर के स्याना कोतवाली क्षेत्र में सोमवार को गोकशी के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित गौरक्षकों की भीड़ और पुलिस के बीच हुयी झड़प में कोतवाली निरीक्षक समेत दो लोगों की मौत  हो गयी जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये थे. इस मामले में  स्याना कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस संबंध में स्याना कोतवाली के सब इंस्पेक्टर सुभाष सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसमें बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज, बीजेपी युवा स्याना के नगर अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, वीएचपी कार्यकर्ता उपेंद्र राघव को भी किया नामजद किया है.

इसके बाद मामले में जांच और गिरफ्तारी के विवरण साझा करते हुए प्रशांत कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, ‘हमने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। दो नामित आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। अन्यों को गिरफ्तार करने के प्रयास चल रहे हैं।’

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इसके अलावा पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। एक एफआईआर कथित मवेशी वध के खिलाफ है और दूसरी हिंसक विरोध प्रदर्शन के खिलाफ है। प्राथमिकी में पुलिस ने 27 लोगों का नाम दिया है। एफआईआर में 60 अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है। 25 जगहों पर पुलिस ने छापेमारी की है।

अपर पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था आनंद कुमार ने सोमवार को कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन हो गया है। एडीजी (इंटेलीजेंस) को भी जांच सौंपी गई है। एडीजी (मेरठ जोन) एसआईटी की अगुवाई करेंगे।

उन्होंने बताया था कि सुबोध कुमार की मौत पत्थर लगने से हुई। इंस्पेक्टर पर गांववालों ने फायरिंग भी की थी। गांव चिंगरावठी गोवंश के अवशेष मिले थे, जिसकी सूचना स्याना के इंस्पेक्टर को दी गई। इसके बाद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने उत्तेजित ग्रामीणों को समझाया-बुझाया। आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस स्टेशन को घेर लिया और जाम लगा दिया। चौकी पर पथराव भी किया गया। करीब 400 लोगों की भीड़ थी, जो आसपास के गांवों से आए थे। उन लोगों ने करीब 15 वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

नम आखों से बोला बेटा अभिषेक, हिन्‍दू-मुस्लिम विवाद ने ली मेरे पिता की जान

अभिषेक 12वीं के छात्र हैं, पर उनकी गहरी सोच बताती है कि प‍िता ने उनमें किस तरह की सोच विकसित की और कैसे उनकी परवरिश की। पिता की मौत के बाद अभिषेक की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। गहरे दुख और पीड़ा के साथ वह कहते हैं, ‘मेरे पिता चाहते थे कि उनके बच्‍चे अच्‍छे नागरिक बनें, ऐसे नागरिक, जो धर्म को लेकर किसी तरह का पक्षपातपूर्ण रवैया न रखता हो और न ही इसके नाम पर समाज में हिंसा न फैलाए। उनका मानना था कि सभी नागरिक समान हैं और उन्‍हें एकजुट रहना चाहिए। उन्‍होंने यही सीख हमें भी दी।’

हालांकि किसी ने शायद ही सोचा होगा कि सामाजिक व सांप्रदायिक सौहार्द की सीख देने वाला शख्‍स एक दिन इसी हिंसा की भेंट चढ़ जाएगा। मौजूदा हालात के बीच अभिषेक का यह सवाल हमारे राजनेताओं से लेकर समाज के अन्‍य लोगों के लिए एक सबक भी है, जिसमें वह कहते हैं, ‘आज हिन्‍दू-मुस्लिम विवाद में मेरे पिता की जान गई, कल किसके पिता की जान जाएगी?’

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