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मायावती ने रचा ‘मायावी’ चक्रव्यूह, क्या इसमें फंसेंगे योगी ?

उत्तर प्रदेश की 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं. लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अखिलेश यादव से गठबंधन तोड़ उपचुनाव में अकेले उतरने का फैसला लिया है. अब इन उपचुनावों में बीजेपी और खासकर सीएम योगी को मात देने के लिए मायावती एक खास चक्रव्यूह रच रही हैं.

17वीं लोकसभा के चुनाव ने प्रदेश में एक और चुनाव की बुनियाद रख दी है. लोकसभा चुनाव मैदान में उतरे प्रदेश सरकार के चार में से तीन मंत्रियों के सिर जीत का सेहरा बंधा. इनके अलावा सपा व बसपा के विधायक भी जीते हैं. लोकसभा चुनाव जीतने वाले मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफे से रिक्त होने वाले 11 विधानसभा क्षेत्रों के अलावा हमीरपुर से भाजपा विधायक अशोक चंदेल को सजा होने के चलते वहां भी उपचुनाव होंगा. इसी के कारण बसपा का पूरा फोकस उपचुनाव को लेकर है और पार्टी के कार्यकर्ता बूथ से लेकर गांव में दल को मजबूत करने के लिए जुट गए हैं.

इसके लिए मायावती पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठन को फिर से खड़ा करने के लिए अंदरखाने तैयारी कर रही हैं. भाजपा, सपा व कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को बसपा के साथ लाने के आदेश बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिए हैं. इनमें सवर्णो के अलावा युवाओं को पार्टी की विचारधारा से अगवत कराने के साथ ही जिलेवार टारगेट भी िए गए हैं.

इसी के चलते बसपा कार्यकार्तओं की एक मंडलीय बैठक पार्टी कार्यालय कानपुर में हुई. जिसमें पार्टी सेक्टर दो प्रदेश प्रभारी व पूर्व सांसद मुनकाद अली ने भंग कमेटियों को फिर से सक्रिय कर संगठन को नए सिरे से तैयार करने के लिए खास रणनीति बनाई गई.

इस बैठक में एमएलसी भीमराव अंबेडकर विनोद संखवार चिंतमणि, मया चरण दिनकर लालाराम अहिरवार और नरेंद कुशवाहा के अलावा बुंदेलखंड के सभी जिलों के पदाधिकारी मौजूद थे. इस दौरान सेक्टर दो यूपी प्रभारी ने लोकसभा में मिली हार की मंडलीय समीक्षा की. सेक्टरव बूथ कमेटियों का फिर से सक्रिय कर दिया गया. प्रभारी ने कहा कि हमें उपचुनाव में कानपुर और बुंदेलखंड की गोविंदनगर, मानिकपुर और हमीरपुर विधानसभा सीट में जीत दर्ज करनी है.

प्रभारी ने कहा कि गांव, कस्बों और मोहल्लों में बूथ और सेक्टर स्तर को मजबूत करना है. जब तक सेक्टर मजबूत नहीं होगा तब तक अच्छे परिणाम नहीं आएंगे. चुनाव की घोषणा से पहले संगठन कर हर हाल में काम पूरा करना है. बसपा प्रमुख मायावती ने इसके लिए 20 से 25 दिन का समय दिया है. पार्टी में दलितों के अलावा ज्यादा से ज्यादा सवर्ण कार्यकर्ताओं को जोड़ें. युवाओं को पार्टी की विचारधारा से अवगत करानें के लिए चौपाल लगाएं और बसपा प्रमुख के कार्यो के अलावा वर्तमान सरकार व बसपा सरकार के कार्यकाल में कानून व्यवस्था कैसी थी उन्हें अवगत कराएं.

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