क्राइम

बहन की अश्लील हरकतों से शर्मिंदा होता भाई, जब समझाने पर भी न समझी तो..

छत्तीसगढ़ की उभरती मॉडल आंचल यादव की हत्या उसके ही भाई सिद्धार्थ ने की थी. पुलिस को उस पर शक आंचल की कार पर मिले फिंगर प्रिंट से हुआ. उसने आंचल की हत्या के बाद उसकी ही कार से लाश को ठिकाने लगाने के लिए मुड़गहन के पास गया और नहर में लाश डाल दी. लेकिन स्निफर डॉग आंचल के ही घर पर आकर बैठ गया. पुलिस के लिए इतना इशारा काफी था. करीब तीन घंटे की पूछताछ में पुलिस ने सिद्धार्थ से सच उगलवा लिया. आंचल की हत्या 25 मार्च की रात कर दी गई थी. उसकी लाश 26 मार्च को सुबह गुरुर थाना के ग्राम मुड़गहन के पास नहर में मिली थी.

पुलिस के अनुसार आरोपी सिद्धार्थ बार बार बयान बदल रहा था. 25 तारीख को पेशी के बाद आंचल विवेकानंद स्थित घर पहुंची थी. लेकिन पुलिस को बताया गया कि वह रात करीब 9 बजे घर आई. आते ही किसी का फोन आया और वह पांच मिनट में आ रही हूं, कहकर किसी वाहन से चली गई. पुलिस ने गुंडरदेही रोड और बस्तर रोड से होते हुए गुरुर जाने वाली रोड के किनारे रहने वाले लोगों से पूछताछ की. लेकिन किसी ने भी संदिग्ध वाहन के बारे में नहीं बताया. और तो और जिस वाहन से वह गई उसका भी पता नहीं चल रहा था. इसलिए भी पुलिस को घर वालों पर शक हुआ.

पुलिस का शक मां ममता यादव पर भी है. क्योंकि उसने उस वाहन के बारे में कुछ भी नहीं बताया जिस पर आंचल यादव का जाना बताया गया. जबकि इस बात संभावना लगभग नहीं है कि उसे इसके बारे में जानकारी न हो. सिद्धार्थ एक सप्ताह से योजना बना रहा था. उसकी योजना थी कि जिस दिन आंचल पेशी में धमतरी आएगी, उसकी हत्या कर देगा. उसने एक सप्ताह तक उस रूट की रेकी भी की थी जिस रूट से वह आंचल की लाश को ठिकाने के लिए धानापुरी ले गए और घटना स्थल से करीब डेढ़ किमी दूर लाश के साथ पत्थर बंधकर फेंक दिया.

दरअसल आचंल के पिता एमएल यादव ने अपनी प्रापर्टी आंचल के नाम कर दी थी. इसलिए भाई सिद्धार्थ आंचल को मारकर खुद प्रापर्टी का मालिक बनना चाहता था. इसके अलावा वह अपनी बहन की हरकतों से भी परेशान रहता था. उसे बहन के बारे में कई अपमानजनक बातें भी सुननी पड़ती थी. आंचल रोजाना 20 से 30 हजार रुपए सिर्फ ग्लैमर्स लाइफ जीने के लिए खर्च करती थी. उसकी अश्लीलता से सिद्धार्थ परेशान था, क्योंकि दोस्त और परिजन चिढ़ाते थे.

 

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