जरा हट के

जिस उम्र में हाथ में होनी चाहिए किताबें, उसमें जलाता है लाशें, कहता है- मां को बचाना है !

कहते हैं कि एक बच्‍चे की परवरिश करना मां बाप का फर्ज होता है लेकिन कई सारे बच्‍चे ऐसे भी होते हैं जिनका बचपन कब चला जाता है पता नहीं चलता है वहीं इसके ठीक विपरीत कई सारे बच्चे हैं जिनका बचपन माता-पिता के सपोर्ट और सुरक्षा से गुजरता है। लेकिन हर बच्चा इतना खुशनसीब नहीं होता कि उसे जिस चीज की जरूरत हो वो मिल सके।

अभिभावक बच्चों की परवरिश यानी पेरेंटिंग को पिछले दो दशक से गंभीरता से लेने लगे हैं। मध्य वर्ग के अभिभावक आज भी अपने बच्चे की पैदाइश से ले कर उसके वयस्क होने तक उसकी हर उपलब्धियों पर अभिभूत रहते हैं। माता-पिता की कोशिश रहती है कि वे अपने बच्चों को हर वो चीज मुहैया करवाएं, जो उन्हें हासिल नहीं हुई। चाहे वह अच्छे स्कूल में पढ़ाई हो, या वीडियो गेम्स, आलीशान बर्थडे पार्टी हो या विदेश की सैर।

बच्चों को बिना मांगे बहुत कुछ मिल रहा है और बिना चाहे मिल रहा है अंधाधुंध प्रतियोगिता, माता-पिता की बढ़ती अपेक्षाएं और अपने आप को साबित करने का दबाव। बच्चा जब पैदा भी नहीं होता, तो उसके पहले से ही माता पिता को अपने बच्चे की भविष्य की चिंता होने लगती है। माता पिता अपने बच्चे का पहले से ही नाम ढूँढ कर रख लेते है, वह उसे किस प्रकार से शिक्षित करना है, ये पहले से ही सोच समझ लेते है। आज हम आपको एक ऐसे ही मासूम की कहानी बताने जा रहे हैं जो अपने मां बाप की परवरिश कर रहा। जी हम बात कर रहें एक 11 साल के मासूम बच्‍चे की जिसने गरीबी के सामने अपने मां बाप के लिए पहाड़ बनकर खड़ा है।

इस बच्‍चे की दुखभरी कहानी सुनकर आपकी आंखे भी नम हो जाएंगी। दरअसल इस बच्‍चे को अपने बिमार मां को बचाने के लिए मजबूरन नाबालिग उम्र में काम करना पड़ रहा है। जरा सोचिए जिस उम्र में बच्‍चे किताबों और दोस्तों के साथ खेलते हैं उस उम्र में ये बच्‍चा लाशों के बीच गुजर रहा है। जी हां हैरान हो गए न दरअसल ये बच्‍चा श्मशान घाट में काम करता। जिससे उसकी मां की दवाइयों का पैसा और खाने का खर्चा निकल जाए।

इस बच्‍चे की पिता की मौत तभी हो गई जब वो छोटा था और फिर कुछ ही समय बाद उसकी मां की तबियत भी खराब रहने लगी। मां काफी समय से बिस्तर से जकड़़ी है। वे ऐसी हालत में कोई काम नहीं कर पाती। बीमारी से वे खुद श्मशान में काम करती थी, जिसके बाद बेटे ने पैसे कमाने के लिए वहीं काम करना शुरू कर दिया।

जहां तक देखा जाए आम इंसान डेड बॉडी के सामने खड़े होने से घबराता है, मगर ये बच्चा बॉडी राख ना बन जाए वहां से हिलता नहीं। इतना ही नहीं, उसका रोज का काम खत्म करके घर जाकर मां के लिए खाना बनाना भी होता है। भगवान भी ऐसा खेल खेलता है इसी समाज में बच्‍चे लग्‍जिरियस लाइफ जीते हैं और इसी समाज में दूसरी तरफ एक बच्‍चा गरीबी की मार झेलता है।

अब इस बच्‍चे की कहानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। वहीं इसकी कहानी सुनकर कई लोगों ने मदद करने की बात कही है। हम उम्मीद करते है ये बच्चा जल्द ही इस काम को छोड़ स्कूल और दोस्तों के बीच वक्त बिता सके।

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