जो कुछ हो रहा आजम खान के साथ, उस पर हमदर्दी ना करे कोई मुसलमान, क्योंकि..?

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आज़म खान के साथ जो हो रहा है उससे मुझे कोई दुख नहीं है और ना ही मुझे उनसे हमदर्दी है , जब आज़म खान को किसी के साथ हमदर्दी नहीं तो किसी को उनसे क्युँ हो ? दरअसल अब आया है ऊँट पहाड़ के नीचे , और आज़म खान को उनके मुसलमान होने का एहसास होना बेहद ज़रूरी है , वर्ना उनका घमंड और उनकी अकड़ नहीं टूटेगी।

हमने इस शख्स को मुज़फ्फरनगर दंगों के समय प्रदेश का सबसे ताकतवर मंत्री रहते देखा है , दंगा पीड़ित मुसलमानों के बदहाल कैंपों की हालत देखी है और आज़मखान का उस समय रवैय्या देखा है , थाने की सारी पुलिस को अपनी भैंस ढूढने में लगा देने वाले आज़म खान मुजफ्फरनगर दंगो में पीड़ितों के लिए कुछ ना कर सके।

एक मेरे जानने वाले बेहद मामुली से काम से इनके पास तब गये जब यह प्रदेश के ताकतवर मंत्री थे , वह भी अपने विभाग में एक मुसलमान होने के कारण प्रताणित थे , आज़मखान ने उनसे कहा कि “आप तो सोच कर आए होंगे कि मेरे विभाग का मंत्री आजमखान मुसलमान है , और आपका काम हो जाएगा ? पर मैं आपको बता दूँ कि आपका काम मैं नहीं करूँगा”।

मेरे जानने वाले भी बोल आए , मुझे आपके बारे मे पता था कि आप कैसे हैं “मैं तो बस आपके मुँह से यही सुनने आया था , आपने सुना दिया , उसका शुक्रिया”

माफ करिएगा , बात कड़वी है , पर उनको भी पीड़ित होने का एहसास महसूस होना चाहिए।

ये लेख स्वतंत्र टीकाकार मोहम्मद जाहिद के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।